हरियाणा के राज्यपाल ने संत रविदास और स्वामी दयानंद सरस्वती को अर्पित की श्रद्धांजलि  

महाकुम्भ नगर, 12 फरवरी(हि. स.)। हरियाणा के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय को महाकुम्भ में परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने बुधवार को रूद्राक्ष का पौधा भेंट किया। राज्यपाल ने संत रविदास और स्वामी दयानंद सरस्वती की जन्म-जयंती के अवसर पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

राज्यपाल दत्तात्रेय ने कहा कि महर्षि स्वामी दयानंद सरस्वती ने आर्य समाज की स्थापना कर समाज में धार्मिक सुधार की दिशा में अनगिनत कार्य किए। उनका दृष्टिकोण समाज के हर तबके के लिए समानता और प्रगति का था। उन्होंने भारतीय समाज में व्याप्त अंधविश्वास, कर्मकांड और अज्ञानता के खिलाफ अपने जीवन को समर्पित कर वेदों की ओर लौटने का संदेश दिया। उनका जीवन एक मिशाल है, और हमें उनकी शिक्षाओं से प्रेरणा लेकर समाज में व्याप्त बुराईयों को दूर करने की दिशा में काम करना चाहिए।

उनका योगदान न केवल धार्मिक उन्नति के लिए था, बल्कि उन्होंने भारतीय समाज की सामाजिक और सांस्कृतिक धारा को भी एक नई दिशा दी।

राज्यपाल ने कहा कि संत रविदास ने भारतीय समाज में दलितों और पिछड़े वर्ग के लोगों के लिए बराबरी का हक देने का आह्वान किया। उनके विचारों में यह स्पष्ट था कि भगवान किसी भी व्यक्ति को जाति या वर्ण के आधार पर भेदभाव नहीं करते। वे मानते थे कि हर व्यक्ति के भीतर दिव्यता और प्रभु का अंश है।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने श्रद्धांजलि देते अर्पित करते हुए कहा कि संत रविदास व दयानंद सरस्वती ने समाज में भेदभाव और जातिवाद के खिलाफ संघर्ष किया। उनका संदेश हमेशा समानता, भाईचारे और एकता का रहा। उन्होंने अपनी वाणी और शिक्षाओं के माध्यम से समाज को जात-पात और भेदभाव से मुक्त करने की दिशा में काम किया।

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