परीक्षा के दिन पेपर आरंभ होने के एक घंटे के भीतर ही प्रश्न पत्र के कुछ पेज सोशल मीडिया पर जारी कर दिए गए थे। कठोर प्रतिस्पर्धा के युग में 1 नंबर से भी कई परीक्षार्थी बाहर हो जाते हैं इसलिए प्रश्न पत्र के कुछ पेजों का बाहर आना और सोशल मीडिया द्वारा प्रकाशित किया जाने की प्रामाणिक घटना को ” पेपर लीक ” की श्रेणी में रखा जाना चाहिए।यशपाल आर्य ने कहा कि नकल कानून के बाद भी परीक्षा में नकल की इस प्रमाणिक घटना से प्रदेश के परीक्षार्थियों, विद्यार्थियों, युवाओं, अभिवावकों और आम जन का राज्य में हो रही परीक्षाओं की निष्पक्षता से विश्वास समाप्त हो गया है ।

बार बार परीक्षाओं में नकलों के मामले आने और आरोपियों के फिर आसानी से जमानत पर छूटने से राज्य के निवासियों का राज्य की जांच एजेंसियों की जांच से भी भरोसा समाप्त हो गया है ।राज्य की जनता का परीक्षा और जांच की निष्पक्षता पर विश्वास बनाए रखने के लिए परीक्षार्थियों की मांग के अनुसार 21 सितंबर 2025 को आयोजित परीक्षा निरस्त कर पुनः परीक्षा आयोजित करने तथा इस परीक्षा के पेपर लीक मामले की आपराधिक जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने का आदेश करने की कृपा कीजियेगा। कहा कि इस संबंध में मैं तथा कांग्रेस विधान मंडल दल के सदस्य विधायक समाचार पत्रों तथा सभाओं के माध्यम से भी उपरोक्त मांगों को कर चुके हैं।

By editor

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