नई दिल्ली, 21 अक्टूबर । लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स में आज ही के दिन चीनी सैनिकों के हमले में 10 बहादुर पुलिसकर्मियों की शहादत की याद में पुलिस स्मृति दिवस मनाया जा रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राष्ट्रीय पुलिस स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित करके बलिदानियों को याद किया। उन्होंने कहा कि सेना भारत की भौगोलिक अखंडता की रक्षा करती है, तो पुलिस भारत की सामाजिक अखंडता की रक्षा करती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि देश से नक्सलवाद की समस्या अगले साल मार्च तक समाप्त हो जाएगी।

राष्ट्र के प्रति उनकी सेवा के लिए पुलिस और अर्धसैनिक बलों को भावभीनी श्रद्धांजलि देते हुए उन्होंने कहा कि आज पुलिस को न केवल अपराध से, बल्कि धारणा से भी लड़ना है। यह अच्छी बात है कि हमारी पुलिस अपने आधिकारिक कर्तव्य के साथ-साथ अपने नैतिक कर्तव्य का भी बखूबी निर्वहन कर रही है। आज देश के नागरिकों को विश्वास है कि अगर कुछ गलत होता है, तो पुलिस उनके साथ खड़ी रहेगी। रक्षा मंत्री ने कहा कि पुलिस स्मृति दिवस देश की सुरक्षा में अपने आप को समर्पित कर देने वाले हमारे पुलिस और सभी अर्धसैनिक बलों के जवानों के त्याग को याद करने का दिन है।

राजनाथ सिंह ने कहा कि पुलिस व्यवस्था तभी प्रभावी रूप से काम कर सकती है, जब समाज के नागरिक पुलिस के सहयोगी के रूप में काम करते हैं और कानून का सम्मान करते हैं। जब समाज और पुलिस के बीच संबंध आपसी समझ और ज़िम्मेदारी पर आधारित होते हैं, तब समाज और पुलिस बल दोनों समृद्ध होते हैं। वर्तमान चुनौतियों पर राजनाथ सिंह ने कहा कि सीमाओं पर अस्थिरता के साथ ही समाज में नए प्रकार के अपराध, आतंकवाद और वैचारिक युद्ध उभर रहे हैं। अपराध अधिक संगठित, अदृश्य और जटिल हो गया है और इसका उद्देश्य समाज में अराजकता पैदा करना, विश्वास को कम करना और राष्ट्र की स्थिरता को चुनौती देना है।

रक्षा मंत्री ने अपराध रोकने की अपनी आधिकारिक जिम्मेदारी निभाने के साथ-साथ समाज में विश्वास बनाए रखने के अपने नैतिक कर्तव्य को पूरा करने के लिए पुलिस की सराहना की। उन्होंने कहा कि अगर आज लोग चैन की नींद सो रहे हैं, तो इसका कारण हमारे सतर्क सशस्त्र बलों और सतर्क पुलिस पर उनका भरोसा है। यही विश्वास हमारे देश की स्थिरता की नींव है। लंबे समय से आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती रहे नक्सलवाद की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए राजनाथ सिंह ने जोर देकर कहा कि पुलिस, सीआरपीएफ, बीएसएफ और स्थानीय प्रशासन के संगठित और समन्वित प्रयासों से वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों के लोगों ने राहत की सांस ली है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि देश से नक्सलवाद की समस्या अगले साल मार्च तक समाप्त हो जाएगी। उन्होंने कहा कि इस वर्ष कई शीर्ष नक्सलियों का सफाया किया गया है। राज्य के खिलाफ हथियार उठाने वाले अब आत्मसमर्पण करके विकास की मुख्यधारा में शामिल हो रहे हैं। वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित जिलों की संख्या में भारी कमी आई है। कभी नक्सलियों के गढ़ रहे क्षेत्र अब शिक्षा के गढ़ बन रहे हैं। कभी लाल गलियारे के रूप में पहचान रखने वाले इलाके अब विकास के गलियारों में तब्दील हो गए हैं। इस सफलता में हमारी पुलिस और सुरक्षा बलों का महत्वपूर्ण योगदान है।

इस कार्यक्रम के तहत केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) और दिल्ली पुलिस की संयुक्त परेड आयोजित की गई। केंद्रीय गृह राज्यमंत्री बंदी संजय कुमार, गृह सचिव गोविंद मोहन, खुफिया ब्यूरो के निदेशक तपन डेका, सीमा सुरक्षा बल के महानिदेशक दलजीत सिंह चौधरी, सीएपीएफ के अन्य प्रमुख, सेवानिवृत्त महानिदेशक और पुलिस बिरादरी के अधिकारी इस कार्यक्रम में शामिल हुए।————

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