नई दिल्ली, 25 फ़रवरी । पटियाला हाउस कोर्ट ने लाल किला ब्लास्ट मामले में गिरफ्तार दो आरोपितों को 10 दिनों की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) हिरासत में भेज दिया है। प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज पीतांबर दत्त ने दोनों को 10 दिनों की एनआईए हिरासत में भेजने का आदेश दिया।
कोर्ट ने तुफैल अहमद भट और जमीर अहमद अहंगर को एनआईए हिरासत में भेजने का आदेश दिया। एनआईए ने दोनों की 15 दिनों की हिरासत की मांग की थी। दोनों आरोपितों को जम्मू-कश्मीर की पुलिस ने दिल्ली में प्रोडक्शन वारंट पर लाया था। एनआई के मुताबिक जमीर अहमद को उमर उन नबी, मुफ्ती इरफान और डॉक्टर अदील अहमद रतहर ने राईफल, पिस्तौल और जिंदा कारतूस उपलब्ध कराए थे। दोनों आरोपितों का संबंध आतंकी समूह अंसार गजवत-उल-हिंद से है।
एनआईए के मुताबिक 10 नवंबर को लाल किले के बाहर हुए कार बम विस्फोट की योजना उमर उन नबी ने बनाई थी। उमर उन नबी की मौके पर ही मौत हो गई थी। इस ब्लास्ट में 15 लोगों की जान गई थी और करीब दो दर्जन लोग घायल हुए थे।
पटियाला हाउस कोर्ट ने इस मामले की जांच के लिए एनआईए को 45 दिनों का और समय दे दिया है। एनआईए ने इसकी जांच की समय सीमा 90 दिन और बढ़ाने की मांग की थी। कोर्ट ने इस मामले के छह आरोपियों की न्यायिक हिरासत 13 मार्च तक बढ़ाने का आदेश दिया था।
बता दें कि एनआईए ने आरोपित दानिश को श्रीनगर से गिरफ्तार किया था। एनआईए के मुताबिक दानिश ने ड्रोन में तकनीकी बदलाव किए थे और कार बम विस्फोट से पहले रॉकेट तैयार करने की कोशिश की। एनआईए के मुताबिक दानिश ने उमर उन नबी के साथ मिलकर पूरी साजिश को अंजाम देने में अहम भूमिका निभाई। एनआईए के मुताबिक राजनीति विज्ञान में स्नातक दानिश को आत्मघाती हमलावर बनाने के लिए उमर ने ब्रेनवाश किया। वह अक्टूबर, 2024 में कुलगाम की एक मस्जिद में डॉक्टर मॉड्यूल से मिलने को तैयार हुआ, जहां से उसे हरियाणा के फरीदाबाद में अल फलाह विश्वविद्यालय में रहने के लिए ले जाया गया।
लालकिला के पास 10 नवंबर, 2025 को आई10 कार में ब्लास्ट हुआ था। ये कार आमिर रशीद अली के नाम पर थी। इस ब्लास्ट में 13 लोगों की मौत हाे गई थी और 32 लोग घायल हो गए थे।
