प्रयागराज, 19 अगस्त । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा कि केवल दो आपराधिक केस के आधार पर उत्तर प्रदेश गुंडा नियंत्रण अधिनियम 1970 के तहत ‘गुंडा’ घोषित करना स्थापित विधि सिद्धांत का उल्लंघन है।

कोर्ट ने इसी के साथ याची के खिलाफ गुंडा एक्ट की कार्यवाही रद्द कर दी है तथा एडीएम ललितपुर को भविष्य में ऐसी नोटिस जारी करने में सावधानी बरतने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना की खंडपीठ ने सौरभ कुमार की याचिका पर दिया।

याची सौरभ कुमार के खिलाफ 30 जून 2025 को एडीएम ललितपुर ने यूपी गुंडा एक्ट की धारा 3 के तहत कारण बताओ नोटिस जारी किया था। दो मुकदमों में नाम दर्ज होने व एक बीट रिपोर्ट के आधार पर गुंडा एक्ट की कार्रवाई की गई थी। याची ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी। दलील दी कि केवल दो आपराधिक मामलों और एक बीट रिपोर्ट के आधार पर इस प्रकार की नोटिस जारी करना कानून का उल्लंघन है।

गोवर्धन बनाम राज्य (2023) के मामले का हवाला दिया जिसमें कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि मात्र दो मामलों में नाम आने से किसी को ‘गुंडा’ की परिभाषा में नहीं लाया जा सकता। कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद गुंडा एक्ट की कार्रवाई के लिए जारी की गई एडीएम ललितपुर की नोटिस को प्रशासनिक शक्ति का दुरुपयोग मानते हुए रद्द कर दिया। साथ ही उन्हें भविष्य में ऐसे मामलों में कानूनी मानकों का पालन करने और सावधानी बरतने के निर्देश दिए।

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