मुज़फ्फरनगर। चर्चित छपार टोल प्लाजा हत्या और रंगदारी विवाद का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। अब पुलिस जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया है। प्रारंभिक जांच में जिन नामों पर आरोप लगाए गए थे, वे अब निर्दोष साबित हो चुके हैं, जबकि जांच की सुई एक नए नाम पर जाकर टिक गई है।विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, पुलिस की ताजा रिपोर्ट में बुढ़ाना ब्लॉक के पूर्व प्रमुख व रालोद नेता विनोद मलिक की शिकायत में नामजद मांगेराम त्यागी, दीपक गुर्जर और प्रमेंद्र के खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिले हैं। वहीं, छपार निवासी सचिन त्यागी की भूमिका इस पूरे प्रकरण में संदिग्ध पाई गई है। पुलिस सूत्रों का दावा है कि सचिन के टोल संचालन से जुड़े कुछ कॉल रिकॉर्ड्स और सीसीटीवी फुटेज सामने आए हैं, जिनकी बारीकी से जांच की जा रही है।गौरतलब है कि 19 अक्टूबर की रात टोल प्लाजा पर डिप्टी मैनेजर अरविंद पांडे की हत्या के बाद पूरे जिले में सनसनी फैल गई थी।

हत्या के आरोप में टोल कर्मियों शिव मलिक और शुभम मलिक सहित छह लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। लेकिन इसके बाद टोल संचालन और कथित रंगदारी विवाद को लेकर राजनीतिक तापमान तेजी से बढ़ गया था।रालोद नेता विनोद मलिक ने एसएसपी से मिलकर यह आरोप लगाया था कि कुछ लोगों ने टोल प्लाजा पर कब्जा कर लिया और हर महीने रंगदारी की मांग की। इसी आरोप के आधार पर 26 अक्टूबर को मुकदमा दर्ज हुआ था। मगर जांच के दौरान पुलिस को आरोपों के समर्थन में कोई ठोस सबूत नहीं मिला।सूत्रों का कहना है कि पुलिस ने सभी संबंधित पक्षों से बयान दर्ज कराए और मौके का निरीक्षण भी किया। इस दौरान यह भी स्पष्ट हुआ कि टोल बंद रहने के पीछे स्थानीय कर्मचारियों और ठेकेदारों के बीच का आंतरिक विवाद प्रमुख कारण था, न कि किसी बाहरी दबाव का नतीजा।

पुलिस के अनुसार, अब पूरा फोकस सचिन त्यागी की भूमिका पर है, जिसकी संलिप्तता हत्या के बाद के घटनाक्रम से जुड़ी पाई जा रही है। जांच टीम ने उसके मोबाइल डेटा, बैंक लेनदेन और कॉल डिटेल्स खंगालने शुरू कर दिए हैं।इस बीच, मांगेराम त्यागी के समर्थकों ने राहत की सांस ली है। उन्होंने कहा कि यह “न्याय और सत्य की जीत” है। वहीं, प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, इस पूरे प्रकरण की जांच अब एसपी सिटी के निर्देशन में अंतिम चरण में है और अगले कुछ दिनों में पुलिस औपचारिक रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत करेगी।छपार टोल प्रकरण अब सिर्फ एक हत्या या रंगदारी विवाद नहीं रहा यह राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक समीकरणों का जटिल मिश्रण बन चुका है, जिसकी गूंज आने वाले दिनों में जिले की सियासत तक सुनाई दे सकती है।

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