गाैरतलब है कि सोमवार को शुरू हुए इस ब्लैकआउट ने देश की अर्थव्यवस्था को ठप कर दिया। इसके कारण उड़ानें भी रद्द हुई और लोग बाहरी दुनिया से कट गए।
इस बीच “नेटब्लॉक्स” जैसे वैश्विक इंटरनेट निगरानी संगठनों के अनुसार यह पूर्ण ब्लैकआउट था जिसमें मोबाइल डेटा, फाइबर-ऑप्टिक नेटवर्क और टेलीफोन सेवाएं प्रभावित हुईं। काबुल हामिद करजई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उड़ानें रुक गईं, बैंकिंग सेवाएं ठप हो गईं और व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हुईं। उधर संयुक्त राष्ट्र के अफगानिस्तान मिशन (यूएनएएमए) ने तालिबान से तत्काल सेवाएं बहाल करने की अपील की थी क्योंकि यह मानवीय सहायता, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को बाधित कर रहा था।
यह प्रतिबंध अफगानिस्तान के सर्वोच्च नेता शेख हिबतुल्लाह अखुंदजादा के नए आदेश पर आधारित था जो “नैतिकता उपायों” के तहत इंटरनेट पर अश्लील सामग्री रोकने के उद्देश्य से लगाया गया। हालांकि मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच ने इसे “अनावश्यक संकट” करार दिया।य
सेवाओं की बहाली से अफगानिस्तान में कुछ राहत मिली है लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में इस तरह की तालिबानी “सेंसरशिप” नीतियां और ब्लैकआउट ला सकती हैं।
