अंतरिक्ष की अनंत गहराइयों में कुछ ऐसा तैर रहा है जो वैज्ञानिकों की रातों की नींद उड़ाए हुए है। हम अक्सर बड़े एस्टेरॉयड्स या टूटते तारों की बात करते हैं, लेकिन असली खतरा उन ‘अदृश्य’ पत्थरों में छिपा है जो चुपचाप हमारी ओर बढ़ रहे हैं। नासा के विशेषज्ञों ने हाल ही में एक ऐसी चेतावनी दी है जिसने वैश्विक सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अंधेरे में छिपे ‘सिटी-किलर’ का खौफ
नासा की ग्रह रक्षा विशेषज्ञ केली फास्ट ने एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया है कि अंतरिक्ष में लगभग 15,000 ऐसे एस्टेरॉयड्स मौजूद हो सकते हैं जिनके बारे में हमें कोई जानकारी नहीं है। ये साधारण पत्थर नहीं हैं; इनमें से हर एक में इतनी ऊर्जा है कि वे पलक झपकते ही एक पूरे शहर को राख के ढेर में बदल सकते हैं। वैज्ञानिक इन्हें ‘सिटी-किलर्स’ (शहर-नाशक) कह रहे हैं, क्योंकि इनका आकार लगभग 500 फीट के करीब होता है।

केली फास्ट के अनुसार, बड़े एस्टेरॉयड्स की स्थिति हमें पता है और बहुत छोटे पत्थर वायुमंडल में ही जल जाते हैं, इसलिए उनसे डर नहीं है। असली चुनौती ये मध्यम आकार के पिंड हैं। ये इतने छोटे हैं कि मौजूदा दूरबीनों की नजरों से बच निकलते हैं, लेकिन इतने बड़े जरूर हैं कि किसी भी क्षेत्र में भारी तबाही मचा सकें।

सूर्य की रोशनी बनी रुकावट
सबसे बड़ी समस्या इन asteroids का पता लगाना है। ये पिंड पृथ्वी के साथ सूर्य की परिक्रमा कुछ इस तरह करते हैं कि वे सूरज की चमक के पीछे छिप जाते हैं। इस वजह से वे प्रकाश को परावर्तित नहीं कर पाते और हमारी सबसे आधुनिक दूरबीनें भी उन्हें देख नहीं पातीं। आंकड़ों की मानें तो हमारे पास से गुजरने वाले करीब 25,000 एस्टेरॉयड्स में से हमें सिर्फ 40% के ठिकाने का पता है, बाकी 60% अंधेरे में गुम हैं।

भविष्य की तैयारी: अंतरिक्ष में तैनात होगा नया ‘पहरेदार’
इस अदृश्य खतरे से निपटने के लिए नासा हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठा है। अगले साल ‘नियर-अर्थ ऑब्जेक्ट सर्वेयर’ (NEO Surveyor) नामक एक विशेष अंतरिक्ष दूरबीन लॉन्च करने की तैयारी है। यह टेलिस्कोप सामान्य रोशनी के बजाय ‘थर्मल सिग्नेचर’ (गर्मी के संकेतों) का इस्तेमाल करेगा, जिससे अंधेरे में छिपे ठंडे और काले एस्टेरॉयड्स को भी पकड़ा जा सकेगा।

हालांकि, केवल पता लगा लेना ही काफी नहीं है। केली फास्ट ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में हमारे पास इन ‘शहर-नाशकों’ को रोकने के लिए कोई पुख्ता सुरक्षा कवच नहीं है। चुनौती सिर्फ उन्हें खोजने की नहीं, बल्कि उन्हें समय रहते नष्ट करने या उनका रास्ता मोड़ने की तकनीक विकसित करने की भी है। जब तक हम इस दिशा में पूरी तरह सक्षम नहीं हो जाते, ये 15,000 अनजान पत्थर पृथ्वी के सिर पर एक अदृश्य तलवार की तरह लटके रहेंगे।

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