साइबर क्राइम टीम ने कराई 50 लाख की रिकवरी मुज़फ्फरनगर | साइबर क्राइम थाना पुलिस ने सोशल साइट पर दोस्ती और निवेश पर अधिक लाभ का लालच देकर की गई तीन करोड़ नौ लाख बाइस हजार रुपये की ठगी का पर्दाफाश करते हुए दो शातिर लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस लाइन स्थित सभागार में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा ने प्रेस वार्ता कर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अब तक पचास लाख रुपये की धनराशि पीड़ित के खाते में वापस कराए जाने की प्रक्रिया चल रही है, जो मुज़फ्फरनगर साइबर पुलिस की अब तक की सबसे बड़ी रिकवरी है। प्रेस वार्ता में पुलिस अधीक्षक अपराध इन्दु सिद्धार्थ भी मौजूद रहीं।एसएसपी ने बताया कि वादी सचिन कुमार से एक युवती ने फेसबुक पर मित्रता की और मीठी बातें कर विश्वास जीत लिया। पहले पचास हजार रुपये निवेश कराए गए और दो दिनों में लाभ दिखाकर लौटाया गया। इसके बाद एक लाख, पाँच लाख और दस लाख की धनराशि का लेनदेन होता रहा। धीरे-धीरे रकम बढ़ती गई और कुल मिलाकर तीन करोड़ से अधिक रुपये विभिन्न खातों में भेज दिए गए। जब पचास लाख रुपये फंस गए तो युवती ने अपनी पहचान, मोबाइल नंबर और फेसबुक आईडी बंद कर दी।
जांच में यह भी सामने आया कि जिस पेज और लिंक के माध्यम से पीड़ित से संपर्क किया गया था, उसकी गतिविधि कंबोडिया और कोलंबिया से जुड़ती मिली, जिससे इस ठगी का तार विदेशों में बैठे गिरोह से जुड़ा होना सामने आता है।थाना साइबर क्राइम पुलिस मोहम्मद माज निवासी लखनऊ और अम्बरीश मिश्रा निवासी जौनपुर को गिरफ्तार किया। इनके कब्जे से तीन मोबाइल फोन और एक फर्जी आधार कार्ड बरामद हुआ। पूछताछ में दोनों ने बताया कि वे पहचान छुपाने के लिए फर्जी नाम और आधार का उपयोग करते थे। अम्बरीश पहले दिल्ली में वाहन खड़ा कराने का काम करता था, कमाई कम होने पर वह ठगी के लिए बैंक खाते उपलब्ध कराने लगा। उसके बाद उसकी मुलाकात उपेन्द्र चंदेल से हुई जिसने उसे खातों के माध्यमe से आने वाली धनराशि पर प्रतिशत के आधार पर हिस्सा देने की बात कही।पूछताछ में सामने आया कि ठगी के इस प्रकरण में कुल उनतीस बैंक खातों का उपयोग किया गया।
इनमें से कई खातों में तमिलनाडु, दिल्ली और महाराष्ट्र से भी शिकायतें दर्ज हैं। एक संस्था के खाते में अकेले एक करोड़ सत्ताईस लाख रुपये का लेनदेन पाया गया।एसएसपी ने बताया कि पुलिस अब इस गिरोह के सरगना की तलाश में जुटी है, जिसकी भूमिका सबसे अहम मानी जा रही है। डिजिटल विश्लेषण के आधार पर उसकी गतिविधियों और लोकेशन की जानकारी जुटाई जा रही है। जल्द ही इस गिरोह के बाकी लोगों को भी पकड़ लिया जाएगा।कार्रवाई करने वाली टीम में प्रभारी निरीक्षक सुल्तान सिंह, निरीक्षक प्रदीप कुमार, उपनिरीक्षक गौरव चौहान, उपनिरीक्षक धर्मराज यादव, हेड कांस्टेबल बालकिशन, हेड कांस्टेबल आकाश चौधरी और कांस्टेबल राहुल कुमार शामिल रहे।
