मुज़फ्फरनगर | दिल्ली में लालकिला के पास सोमवार शाम हुए कार बम धमाके के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सुरक्षा एजेंसियों की गतिविधि तेज हो गई है। खासतौर पर मुजफ्फरनगर को जांच दायरे में इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह जिला लंबे समय तक आतंकवादियों का सुरक्षित ठिकाना माना जाता रहा है। बीते वर्षों में यहां से कई आतंकी संगठनों से जुड़े आरोपी भी पकड़े जा चुके हैं।मेरठ, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर का इलाका समय-समय पर आतंकी गतिविधियों का केंद्र रहा है, जिसके चलते यह पूरा क्षेत्र लगातार खुफिया अलर्ट पर रहता है। सूत्रों के अनुसार दिल्ली धमाके के बाद मुजफ्फरनगर और शामली में सुरक्षा एजेंसियों की विशेष निगरानी बढ़ाई गई है। शामली के कैराना और कांधला का नाम भी कई बार आतंकी कनेक्शन में सामने आ चुका है। इसी कारण जांच एजेंसियां एक बार फिर 90 के दशक से अब तक पकड़े गए आतंकियों और उन्हें पनाह देने वालों की कुंडली खंगालने में जुट गई हैं।

हाल ही में अहमदाबाद एटीएस ने झिंझाना कस्बे के मोहल्ला शेखा मैदान निवासी आतंकी आजाद शेख को गिरफ्तार किया था। इसके अलावा सैफी और कांधला पुलिस ने बुढ़ाना निवासी इस्लाम नामक आरोपी को भी दस्तावेजों सहित पकड़ा था।2014 में खतौली पुलिस और एटीएस ने आतंकी सलीम पतला को गिरफ्तार किया था, जो मुरादाबाद में मोबाइल की दुकान चलाकर छिपा हुआ था और कश्मीर के अलगाववादी संगठनों से जुड़ा था। जुलाई 2017 में जम्मू पुलिस ने अंकित विहार, मुजफ्फरनगर निवासी सदीप कुमार शर्मा को अनंतनाग से गिरफ्तार किया था, जो लश्कर-ए-तैय्यबा के लिए काम कर रहा था और वहां बम धमाका भी कर चुका था।इसी तरह अगस्त 2017 में एटीएस ने चरथावल क्षेत्र के कुटसेरा स्थित हुसैनिया मस्जिद से इमाम अब्दुल्लाह उल मामेन को गिरफ्तार किया था, जिसके पास से फर्जी पासपोर्ट और आधार कार्ड मिला था।दिल्ली ब्लास्ट के बाद इन सभी मामलों को फिर से खंगाला जा रहा है और सुरक्षा एजेंसियां पश्चिमी यूपी में हर छोटी-बड़ी गतिविधि पर विशेष नजर बनाए हुए हैं।

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