मध्य प्रदेश पुलिस विभाग में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है, जिसके तहत प्रदेश के सभी पुलिस ट्रेनिंग सेंटरों में भगवद् गीता का पाठ पढ़ाया जाएगा। यह कदम नए भर्ती होने वाले कांस्टेबलों को न केवल पेशेवर रूप से प्रशिक्षित करने, बल्कि उन्हें नैतिकता और आध्यात्मिकता की शिक्षा देने के उद्देश्य से उठाया गया है। यह अब तक का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव होने जा रहा है। इससे उन्हें तनावपूर्ण माहौल में भी मदद सही फैसला लेने में मदद मिलेगी।
आखिर गीता का पाठ ही क्यों?
मध्य प्रदेश पुलिस अब अपने जवानों को कर्तव्यनिष्ठा और सही आचरण के लिए भगवद् गीता के सार से परिचित कराएगी। ऐसे में विभाग का मानना है कि गीता में दिए गए कर्मयोग, निष्काम और एक समान भाव के सिद्धांतों के बारे में बताया जाएगा। जिससे पुलिस कांस्टेबल कठिन परिस्थितियों में सही निर्णय और तनावपूर्ण माहौल को आसानी से हैंडल कर सकेंगे। नए कांस्टेबलों को अब ‘आदर्श पुलिस अधिकारी’ बनाने की दिशा में यह एक बड़ा कदम है, जो सेवा और समर्पण की भावना को बल देगा। आपको बता दें, भगवद् गीता हिंदू धर्म का शाश्वत धर्मग्रंथ है। इसका नियमित पाठ निश्चित रूप से हमारे प्रशिक्षुओं को धार्मिक जीवन जीने के लिए प्रेरित करेगा और उनका जीवन बेहतर होगा।
एडीजी राजा बाबू सिंह ने की पहल शुरू
मध्यप्रदेश पुलिस में एडीजी राजा बाबू सिंह ने एक ऐसी पहल शुरू की है, जो न केवल पुलिस प्रशिक्षण को एक नया आयाम दे रही है, बल्कि जवानों के जीवन को भी एक गहरा नैतिक आधार प्रदान करने का प्रयास कर रही है। उनका यह मानना है कि हमारे शाश्वत ग्रंथ, रामचरितमानस और श्रीमद्भगवद्गीता, जीवन का असली सार बताते हैं और एक अनुशासित, नैतिक जीवन जीने की कला सिखाते हैं।
सिपाही पीला कुर्ता पहन करते हैं भगवद्गीता का पाठ
कड़ी ट्रेनिंग और ड्यूटी के बाद जब सिपाही एक साथ बैठते हैं, तो पीला कुर्ता पहने एक व्यक्ति उन्हें श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोक और उनके अर्थ पढ़कर सुनाता है। बता दें, इनमें करीब 4000 युवक-युवतियां कॉन्स्टेबल पद के लिए 9 महीने का प्रशिक्षण ले रहे हैं।
