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कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने संसद भवन परिसर में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि किसी योजना का नाम इस तरह बदलने से भारी प्रशासनिक खर्च आता है। नाम बदलने से जनता को क्या लाभ होगा और यह किसके लिए किया जा रहा है। यह समझने की जरूरत है कि महात्मा गांधी का नाम इस योजना से क्यों हटाया जा रहा है और इसके पीछे सरकार की मंशा क्या है।

कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने कहा कि मनरेगा महात्मा गांधी के नाम पर बनी एक ऐतिहासिक योजना है, जिसे संसद में 50 घंटे से अधिक चर्चा के बाद पारित किया गया था। पिछले 20 वर्षों में इस योजना ने देश में बड़ा सामाजिक और आर्थिक बदलाव किया है और करोड़ों गरीब परिवारों को काम की गारंटी दी है। टैगोर ने इसे महात्मा गांधी का अपमान बताते हुए कहा कि उनका नाम इस योजना से हटाया नहीं जाना चाहिए। सरकार को महात्मा गांधी के नाम से नफरत है और इसी कारण यह कदम उठाया जा रहा है।

सपा के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि यह डबल इंजन सरकार दूसरों के कामों को अपना बताने में लगी है। उन्होंने कहा कि सरकार के पास कोई नया काम नहीं है, इसलिए पुरानी योजनाओं का नाम बदलकर पेश किया जा रहा है। अगर सरकार आर्थिक प्रगति के बड़े दावे कर रही है तो फिर काम की गारंटी केवल 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन ही क्यों की जा रही है। सरकार को कम से कम 200 दिन के रोजगार की गारंटी देनी चाहिए थी और अगर ऐसा होता तो उन्हें खुशी होती।

उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार मनरेगा को समाप्त कर नया ग्रामीण रोजगार कानून लाने की तैयारी में है, जिसे मौजूदा शीतकालीन सत्र में चर्चा के लिए सूचीबद्ध किया गया है। बिल की प्रति सोमवार को लोकसभा सांसदों के बीच वितरित की गई है। प्रस्तावित कानून का नाम ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी राम जी) बिल, 2025’ रखा गया है। नए विधेयक में ‘विकसित भारत 2047’ के राष्ट्रीय विजन के अनुरूप ग्रामीण विकास का नया ढांचा तैयार करने की बात कही गई है और काम के दिनों की संख्या 100 से बढ़ाकर 125 दिन करने का प्रस्ताव है।

By editor

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