सरकार ने मध्य पूर्व संघर्ष से उत्पन्न मुद्दों की निगरानी के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में एक अंतर-मंत्रालयी समूह का गठन किया है। सूत्रों के अनुसार, गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी सहित अन्य मंत्री भी इस समूह के सदस्य हैं। इस बीच सरकार ने पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में उछाल से उपभोक्ताओं को बचाने के लिए पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क घटाकर तीन रुपये प्रति लीटर कर दिया है और डीजल पर इसे शून्य कर दिया गया है।

वित्त मंत्रालय द्वारा 26 मार्च की देर रात जारी एक अधिसूचना के अनुसार, पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क 13 रुपये प्रति लीटर से घटाकर तीन रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है, जबकि डीजल पर यह शुल्क पहले के 10 रुपये से घटाकर शून्य कर दिया गया है। मंत्रालय ने कहा कि शुल्क में यह कटौती तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उछाल के बावजूद खुदरा पंप दरों में बदलाव नहीं किया गया है, जिससे तेल कंपनियों की वित्तीय स्थिति पर दबाव पड़ रहा है। तेल कंपनियों को राहत देने के लिए सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती की है।

 

उत्पाद शुल्क में कटौती की अधिसूचना के बाद ईंधन खुदरा विक्रेता कंपनियों इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन के शेयर बीएसई पर बढ़त के साथ खुले। रेटिंग एजेंसी इक्रा ने बृहस्पतिवार को एक नोट में कहा था कि यदि कच्चे तेल की औसत कीमत 100-105 डॉलर प्रति बैरल तक जाती है तो ईंधन खुदरा विक्रेताओं को पेट्रोल पर 11 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 14 रुपये प्रति लीटर का नुकसान होगा। इक्रा ने यह भी कहा था कि खुदरा बिक्री कीमतों को स्थिर रखने के लिए सरकार उत्पाद शुल्क में कटौती कर सकती है। भारत कच्चे तेल की अपनी जरूरतों का 88 प्रतिशत और प्राकृतिक गैस की जरूरत का लगभग आधा हिस्सा आयात करता है।

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