सीतापुर। पैगंबर हज़रत मोहम्मद साहब के जन्मदिवस पर पूरे देश में जश्न-ए-मिलादुन्नबी की रौनक छाई रही। कहीं नारे-ए-तकबीर की गूंज सुनाई दी तो कहीं जुलूस-ए-मोहम्मदी में अकीदतमंदों का जोश-ओ-ख़रोश नजर आया। लेकिन इस बार सीतापुर जनपद के सिधौली क्षेत्र में आयोजित जुलूस ने एक अलग ही मिसाल कायम की। यहां धर्म और जज़्बे के साथ-साथ इंसानियत की ऐसी तस्वीर देखने को मिली जिसने सबका दिल जीत लिया।जुलूस-ए-मोहम्मदी के दौरान लोगों ने सिर्फ धर्म की परंपरा निभाने पर ध्यान नहीं दिया बल्कि यह सोचकर भी योगदान दिया कि इंसानियत सबसे बड़ा मज़हब है।

पंजाब में आई भीषण बाढ़ से जूझ रहे परिवारों की मदद के लिए जुलूस में विशेष ‘चादर-ए-मदद’ निकाली गई। इसमें शामिल हर व्यक्ति ने अपनी क्षमता और इच्छा के अनुसार आर्थिक सहयोग दिया। इस नेक पहल से एक लाख रुपये की राशि इकट्ठा हुई।इस धनराशि को लेकर सात सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल पंजाब के लुधियाना के लिए रवाना हुआ। इस डेलिगेशन में चेयरमैन इमरान अली, सोहेल अहमद, मोहम्मद आलम, नासिर अली, चौधरी, वजहुल कमर और शहेनशाह अली शामिल रहे। यह टीम तयशुदा योजना के तहत राशि को लुधियाना प्रशासन अथवा किसी मान्यता प्राप्त आपदा प्रबंधन संस्था को सौंपेगी, ताकि राहत सीधे पीड़ितों तक पहुँचे,तो इसी नेक मंशा के साथ कई सो किलोमीटर की यात्रा कर आज इस डेलिगेशन ने समाज सेवियों के साथ मिलकर पंजाब– हरियाणा के DC हिमांशु जैन को एक लाख का रुपए चेक बाढ़ से पीड़ित व्यक्तियों के लिए भेट कियाइस कदम की सराहना करते हुए पंजाब के वरिष्ठ समाजसेवी और व्यापार मंडल के उपाध्यक्ष जसपाल सिंह टाइगर ने कहा, “आज जब पंजाब का बड़ा हिस्सा बाढ़ की तबाही झेल रहा है, तब सीतापुर से उठी यह आवाज़ हमारे लिए उम्मीद की किरण है। ऐसे प्रयास बताते हैं कि असली मज़हब इंसानियत और भाईचारा ही है।”यात्रा के दौरान यह प्रतिनिधिमंडल जिन-जिन जनपदों से गुजरा, वहां लोगों ने इसे हाथों-हाथ लिया। बरेली में वरिष्ठ पत्रकार राजवीर सिंह और कमर अहमद ने दल का स्वागत किया। रामपुर पहुंचने पर किसान यूनियन के जिला अध्यक्ष, पत्रकार खान उबेद और स्थानीय लोगों ने फूल मालाओं से दल का सम्मान किया। पंजाब की सरज़मीं पर पहुँचने के बाद समाजसेवी संगठनों और व्यापार मंडल की टीम ने भी जोरदार स्वागत किया। हर जगह एक ही संदेश दिया गया—“मदद करने वाले हाथ, दुआ करने वाले होंठ और स्वागत करने वाले दिल हमेशा ज़िंदा रहेंगे।”इस पूरी यात्रा ने यह साबित कर दिया कि जब इंसानियत का कारवां निकलता है तो सरहदें, मज़हब और जात-पात सब पीछे छूट जाते हैं। एक तरफ पंजाब में बाढ़ से बेघर हुए लोग अपने जीवन की जद्दोजहद में उलझे हैं, वहीं दूसरी ओर सीतापुर जैसे सैकड़ों किलोमीटर दूर बसे लोग उनके लिए राहत और सहानुभूति का पैगाम लेकर खड़े हैं। यही भारत की गंगा-जमुनी तहज़ीब है, जो हर मुश्किल घड़ी में समाज को जोड़ती है।यह पहल आने वाली पीढ़ियों के लिए भी सबक है कि जुलूस और त्यौहार केवल रस्म अदायगी के लिए नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने और ज़रूरतमंदों तक मदद पहुँचाने के लिए भी होने चाहिए। जब भी किसी को दर्द हो, तो उस दर्द को अपना समझकर मदद के लिए आगे बढ़ना ही इंसानियत की असली पहचान है।सीतापुर से पंजाब तक की यह यात्रा यही संदेश दे रही है कि भाईचारा और मोहब्बत हर आपदा से बड़ी ताक़त है। और जब समाज मिलकर खड़ा हो जाता है, तो किसी भी मुश्किल को पार करना नामुमकिन नहीं रहता।

