गौरतलब हो कि ताजेवाला, हिण्डन और ओखला बांधों से लगातार पानी छोड़े जाने के चलते यमुना में उफान जारी है। विश्रामघाट की सीढ़ियां पूरी तरह पानी में डूब चुकी हैं और गोकुल बैराज के सभी गेट खोल दिए गए हैं। इससे बंगाली घाट, स्वामीघाट, विश्रामघाट, असकुण्डा घाट, बंगाली घाट की सभी सीढिया डूब गयी हैं। निचले क्षेत्रों में खतरा और गहराता जा रहा है। जलस्तर बढ़ने से प्रशासन अलर्ट मोड पर है। निचले इलाकों में रह रहे लोगों को सतर्क किया जा रहा है। एनडीआरएफ और आपदा प्रबंधन टीमों को भी तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। स्थानीय निवासियों में भय का माहौल है। कई लोग सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने लगे हैं, वहीं व्यापारी वर्ग भी प्रभावित है। बाढ़ का पानी मंदिरों और घाटों तक पहुंचने से धार्मिक गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं। संभावना जताई जा रही है कि यमुना का जलस्तर अगर इसी रफ्तार से बढता रहा तो बुधवार सुबह तक पानी घाट किनारे के बाजारों में दिखाई दे सकता है। इसे लेकर विद्युत विभाग भी चौकन्ना बना हुआ है।
