इस दौरान श्रद्धालुओं नें अपने साथ लाए सौगात खाजा, चूडा, बिंदी, चूडी, ककड़ी, मुंगरी भी समौण के रूप में मां नंदा को अर्पित किये। अपने अंतिम पडाव से शनिवार सुबह नंदा सप्तमी के दिन नंदा ,राजराजेश्वरी की डोली हिमालयी उच्च बुग्याल बेदनी, बंड की नंदा डोली नरेला बुग्याल, कुरूड दशोली की नंदा डोली बालपाटा पहुंची और यहां पर पूजा अर्चना कर, तर्पण करके मां नंदा को कैलाश के लिए विदा किया।
बंड क्षेत्र की छंतोली नरेला बुग्याल पहुंची जहां पर श्रद्वालुओं ने मां नंदा की पूजा अर्चना कर उन्हें समौण भेंट की और मां नंदा को जागरों के माध्यम से कैलाश की ओर विदा किया गया। इस दौरान पूरा हिमालय मां नंदा के जयकारे से गुंजयमान हो गया।
