काशी केवल एक शहर नहीं, बल्कि एक वैश्विक सांस्कृतिक केंद्र है: वी विद्यावती

—काशी में योगा सेंटर, वेलनेस सेंटर, नेचुरोपैथी चिकित्सा, आयुर्वेद चिकित्सा को बढ़ावा दिया जाएगा

वाराणसी, 30 मई (हि.स.)। केंद्रीय पर्यटन सचिव वी विद्यावती ने वाराणसी को पर्यटन के दृष्टिकोण से विकसित करने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि काशी केवल एक शहर नहीं है, बल्कि एक वैश्विक सांस्कृतिक केंद्र है जो प्राचीन इतिहास, धार्मिक महत्व और कलात्मक परम्पराओं को समेटे हुए है।

केंद्रीय पर्यटन सचिव शुक्रवार को यहां अफसरों के साथ बैठक कर रही थी। बैठक में उन्होंने कहा कि सुधार के दृष्टिगत काशी में अगले दो महीने में बदलाव दिखना चाहिये ताकि अंतरराष्ट्रीय तथा देशी पर्यटकों को अलग अनुभूति हो सके। उन्होंने इसकी शुरुआत बेसिक स्तर से करने की कही। ताकि अगले दो महीने में उचित बदलाव दिखने लगे। शुरुआत में 16 से 20 प्रमुख स्थानों का चयन किया गया है। जिसमें प्रमुख मंदिर, कनेक्टिविटी पॉइंट्स, घाट, सारनाथ आदि शामिल हैं। उन्होंने कहा जो भी बदलाव हो वो सतत होने के साथ दीर्घकालिक होगा।

बैठक में इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास पर चर्चा हुई जिसमें घाटों का सौंदर्यीकरण और सफाई, बेहतर सड़क, बिजली और जल आपूर्ति व्यवस्था, पर्यटन स्थलों तक सुगम पहुँच के लिए परिवहन सुविधाएँ (रिंग रोड, एयरपोर्ट कनेक्टिविटी, नाव सेवाएं भी शामिल रही।

बैठक में प्रदेश के प्रमुख सचिव पर्यटन मुकेश कुमार मेश्राम ने काशी में योगा सेंटर, वेलनेस सेंटर, नेचुरोपैथी चिकित्सा, आयुर्वेद चिकित्सा को प्रमुखता से बढ़ावा देने के लिए अफसरों को निर्देशित किया। जिसमें उन्होंने सरकार के तरफ से आर्थिक मदद देने का भी आश्वासन दिया। उन्होंने काशी आने वाले पर्यटकों को आस—पास के जिलों को भी जोड़ने पर बल दिया। इसमें चंदौली के इको-पर्यटक स्थलों से जोड़ने, विंध्य क्षेत्र के पर्यटक स्थलों, माँ विन्ध्यवासिनी मंदिर, चुनार किला जो की भारत के सबसे पुराना किला है, सोनभद्र जिले के प्राचीन फ़ासिल पार्कों से भी जोड़ने के प्रयास करने को कहा।

इससे पहले वाराणसी परिक्षेत्र के मंडलायुक्त एस राजलिंगम ने केंद्रीय पर्यटन सचिव को तथा जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने उत्तर प्रदेश सरकार में प्रमुख सचिव पर्यटन एवं संस्कृति मुकेश कुमार मेश्राम को बुके देकर स्वागत किया। मंडलायुक्त ने काशी को ग्लोबल पर्यटन के दृष्टिगत विकास के लिए सभी सम्भव प्रयास की चर्चा की।

जिलाधिकारी ने गंगा घाटों की पौराणिकता को डिजिटल कन्टेन्ट ऑडियो फाइल में रिकार्ड करने को कहा। ताकि नावों पर चढ़ने के दौरान पर्यटकों को पूरी जानकारी मिल सके। उन्होंने फूड आउटलेट के मानकीकृत करने की बात कही ताकि हाइजीन मेनटेन किया जा सके। उन्होंने कल्चरल संध्या क्रिएट करने की बात भी कही। इस दौरान स्थानीय व्यवसायों को समर्थन करने, हस्तशिल्प, बनारसी साड़ी, लकड़ी के खिलौनों का प्रचार, स्थानीय कलाकारों, शिल्पकारों और गाइड्स को प्रशिक्षण तथा सुविधाओं को और बेहतर बनाने के लिए विमर्श हुआ। इसके अलावा आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया।

बैठक में नगर आयुक्त अक्षत वर्मा, मुख्य विकास अधिकारी हिमांशु नागपाल, वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन के निदेशक अर्पित गुप्ता, डीएफओ वाराणसी स्वाति सिंह, सीईओ काशी विश्वनाथ मंदिर विश्वभूषण मिश्रा, सचिव विकास प्राधिकरण वेद प्रकाश मिश्र, लोकनिर्माण, स्मार्ट सिटी, संस्कृति, पुरातत्व विभाग समेत पर्यटन विभाग से जुड़े केंद्र तथा राज्य स्तर के अधिकारी मौजूद रहे।

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