प्रयागराज, 13 सितम्बर । इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति डॉ गौतम चौधरी ने हिन्दी में कानून का ऐसा मील का पत्थर रखा, जो वादकारी को उसकी भाषा में न्याय का कीर्तिमान बन गया। जी हां, उन्होंने अपने छह साल के कार्यकाल में हिन्दी में 27,846 निर्णय व आदेश लिखाए हैं। इसी दौरान उन्होंने 51,656 ऐसे निर्णय व आदेश भी किए, जो अंग्रेजी व मिलीजुली भाषा में हैं।

स्थानीय ब्वायज हाईस्कूल के अंग्रेजी माध्यम के छात्र रहे डॉ गौतम चौधरी को हिन्दी के प्रति प्रेम पिता की प्रेरणा से तब बढ़ा, जब पिताजी ने उन्हें हिन्दी विषय में नंबर कम आने के लिए मातृभाषा के प्रति सजग किया था। तभी तो वह अंग्रेजी में आए प्रार्थना पत्रों, याचिकाओं और उनके समर्थन व विरोध में नजीरों के तौर पर प्रस्तुत सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालयों के निर्णयों को अपने निर्णय या आदेश में सरलता से पिरो देते हैं। वह इसका श्रेय स्वयं नहीं लेते बल्कि अपने निजी सचिवों व अन्य स्टॉफ को देते हैं। कहते हैं कि वादकारी को इस तरह त्वरित न्याय देना उनके सहयोग के बिना संभव नहीं है।

न्यायमूर्ति डॉ गौतम चौधरी ने गोरखपुर के चर्चित डॉ कफील खान के मामले में भी हिन्दी में ही निर्णय दिया तो ठोस आधार के बिना किसी व्यक्ति को हिरासत में लेने को मूल अधिकारों का हनन करार देने वाला चर्चित निर्णय भी हिन्दी में ही लिखाया था। यही नहीं, वरिष्ठ न्यायाधीश के साथ दो सदस्यीय खंडपीठ में आपराधिक अपीलों पर सुनवाई के बाद उनके लंबे-लंबे निर्णय हिन्दी में ही स्वयं लिखाए।

छह वर्ष के कार्यकाल में जस्टिस चौधरी के हिन्दी में निर्णयों और आदेशों का लेखा जोखा इस प्रकार हैः-जमानत अर्जी 18049, अग्रिम जमानत 1196, जमानत कैंसिलेशन 493, अग्रिम जमानत कैंसिलेशन 94, गिरफ्तारी पर रोक आदि की अर्जियां 5578, सीआरपीसी की धारा 483 की अर्जियां 16, आपराधिक निगरानी याचिका 679, आपराधिक निगरानी याचिका (डिफेक्टिव) 136, अनुच्छेद 227 के तहत मामले 143, बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका 120, नए आपराधिक कानून (बीएनएसएस) के तहत अग्रिम जमानत 808, सिविल मिसलेनियस रिट याचिका 295, नए आपराधिक कानून (बीएनएसएस) के तहत गिरफ्तारी पर रोक आदि की अर्जियां 97, आपराधिक याचिका 87, आपराधिक अपील 46, आपराधिक अपील (डिफेक्टिव) 15, अन्य 24 हैं। इसी दौरान अंग्रेजी व मिली-जुली भाषा में कुल 51,656 निर्णय व आदेश हैं।

–चार दशक पूर्व शुरू हुई थी हिन्दी में न्याय की परम्पराइलाहाबाद उच्च न्यायालय में हिन्दी में न्याय यानी निर्णय व आदेश की शुरुआत अस्सी के दशक में न्यायमूर्ति प्रेमशंकर गुप्त ने की थी। उन्होंने 15 साल के अपने कार्यकाल में चार हजार से अधिक निर्णय व आदेश हिन्दी में किए थे। उसके बाद न्यायमूर्ति गिरिधर मालवीय, न्यायमूर्ति रामसूरत सिंह, न्यायमूर्ति गिरधारी लाल यादव, न्यायमूर्ति आरबी मेहरोत्रा, न्यायमूर्ति अशोक कुमार ने इस परंपरा को जीवंतता प्रदान की। न्यायमूर्ति शंभूनाथ श्रीवास्तव ने तो प्रतिदिन सुबह 10 से 11 बजे तक सभी आदेश व निर्णय हिन्दी में ही करने का नियम बनाया हुआ था। उन्होंने बतौर छत्तीसगढ़ के लोकायुक्त आठ सौ से अधिक मामले हिन्दी में ही निर्णीत किए। वर्तमान में न्यायमूर्ति डॉ गौतम चौधरी की तरह न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी व न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव ने भी वादकारी को उसकी भाषा में न्याय देकर इस परंपरा को और मजबूती दी।

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