कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल के बीच डेल्टा एयरलाइंस का एक दशक पुराना रणनीतिक फैसला फायदेमंद साबित हो रहा है। अपनी खुद की रिफाइनरी होने के कारण कंपनी ईंधन की बढ़ती लागत के दबाव से बची हुई है और उसे एक तिमाही में सैकड़ों मिलियन डॉलर का मुनाफा होने की उम्मीद है।

गौरतलब है कि उस समय यह फैसला काफी जोखिम भरा माना गया था, लेकिन अब जब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें युद्ध से पहले के करीब 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 100 डॉलर के आसपास पहुंच गई हैं, तब डेल्टा को इसका सीधा लाभ मिल रहा है।मौजूद जानकारी के अनुसार, अपनी खुद की रिफाइनरी होने से डेल्टा को तीसरे पक्ष पर निर्भर नहीं रहना पड़ता और वह बाजार की अस्थिरता से काफी हद तक बच जाती है हैं। कंपनी की यह व्यवस्था उसे बाहरी सप्लायर को भुगतान करने से भी बचाती है और लागत को नियंत्रित रखने में मदद करती है।

कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एड बैस्टियन ने भी संकेत दिया है कि आने वाले समय में यह रिफाइनरी कंपनी की आय को मजबूत बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएगी हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, केवल एक तिमाही में ही इस रिफाइनरी से कंपनी को सैकड़ों मिलियन डॉलर का फायदा होने की उम्मीद जताई गई है।बता दें कि वैश्विक स्तर पर अन्य एयरलाइंस जहां ईंधन कीमतों के उतार-चढ़ाव से जूझ रही हैं, वहीं डेल्टा की यह रणनीति उसे प्रतिस्पर्धा में बढ़त दिला रही है हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल भविष्य में अन्य एयरलाइंस के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है।

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