इसके पहले उच्च न्यायालय ने अगस्त में अखिल भारतीय जन संघ की दूसरी याचिका पर सुनवाई करते हुए निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी किया था। आज सुनवाई के दौरान अखिल भारतीय जन संघ की ओर से कोर्ट को बताया गया कि निर्वाचन आयोग ने ये कहते हुए उनकी मांग खारिज कर दिया कि पार्टी में आंतरिक विवाद हैं। अखिल भारतीय जनसंघ की ओर से कहा गया कि पार्टी से समीर सिंह चंदेल को निलंबित कर दिया है और उनके निलंबन के पार्टी की गतिविधियों का कोई लेना-देना नहीं है। उसके बाद कोर्ट ने निर्वाचन आयोग से जवाब तलब करने का आदेश दिया।
अखिल भारतीय जनसंघ का कहना है कि उनकी पार्टी का रजिस्ट्रेशन 1989 में एक गैर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के रूप में हुआ था। याचिका में अखिल भारतीय जन संघ ने दावा किया था कि उसकी जड़ें भारतीय जन संघ से जुड़ी हुई हैं। अखिल भारतीय जन संघ ने दो जून को निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर एक राजनीतिक दल के रुप में चुनाव चिह्न का आवंटन करने की मांग की थी।
याचिका में कहा गया है अखिल भारतीय जन संघ को चुनाव लड़ने का संवैधानिक अधिकार है। बिहार विधानसभा के चुनाव की घोषणा कभी भी हो सकती है। अगर अखिल भारतीय जन संघ को राजनीतिक दल के रुप में चुनाव चिन्ह आवंटित नहीं किया गया तो चुनाव लड़ने के उसके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन होगा।
