इस अवसर पर देश-विदेश से आये हजारों साधकों ने 27 कुण्डीय यज्ञशाला में गायत्री महायज्ञ में विशेष आहुतियां अर्पित कीं और पावन गुरुसत्ता आत्मशुद्धि, राष्ट्र कल्याण एवं विश्व शांति के लिए प्रार्थना की। कार्यक्रम का संचालन शांतिकुंज की ब्रह्मवादिनी बहनों द्वारा किया गया, जिसमें शांतिकुंज परिवार सहित विभिन्न साधना शिविरों में आये साधकों ने श्रद्धाभाव से यज्ञाहुतियां दीं। सभी साधकों ने आध्यात्मिक चेतना का सामूहिक अनुभव किया।

पूर्णाहुति के बाद उपस्थित जनसमूह ने विश्व कल्याण के लिए विशेष प्रार्थना की और युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य व माता भगवती देवी शर्मा के संकल्प को पूरा करने में हर संभव सहयोग करने का संकल्प लिया। श्रद्धालुओं ने अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख डॉ प्रणव पण्ड्या को विशेष प्रेरणादायी उद्बोधन का लाभ लिया।

इससे पूर्व शांतिकुंज व्यवस्थापक योगेन्द्र गिरि ने कहा कि नवरात्र साधना आत्म-परिष्कार का महाअवसर है। गायत्री साधना तन, मन को पवित्र करती है। शांतिकुंज मीडिया विभाग के अनुसार 2 अक्टूबर को दशहरा के मौके पर देसंविवि परिसर में श्रीरामलीला मंचन के साथ ही रावण दहन का कार्यक्रम होगा।

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