श्रावण मास की शिवरात्रि पर जलाभिषेक के लिए शिवालयों में कांवड़ बेड़ों के साथ श्रद्धालु उमड़े। चौरासी घंटा मंदिर और झारखंडी शिव मंदिर पर रात 12 बजे के बाद से ही हरिद्वार और बृजघाट से कांवड़ लेकर आए कांवड़ियों की भीड़ जुटने लगी थी। मंदिर में भगवान आशुतोष का जयघोष होने लगा था। भीड़ को देखते हुए कांवड़ बेड़ों के साथ आने वाले डीजे और अन्य वाहनों को थाना नागफनी और दीवान का बाजार के चौराहे पर ही रोक दिया गया। भीड़ के कारण 84 घंटा मंदिर और झारखंडी शिव मंदिर के कपाट रात लगभग साढ़े तीन बजे खोल दिए गए थे। 84 घंटा मंदिर के मुख्य पुरोहित पुजारी विष्णु दत्त शर्मा ने बताया कि मंदिर की साफ सफाई के बाद आरती हुई। लगभग 3:30 बजे से सबसे पहले कांवड़ और डाक कांवड़ के जत्थों ने जलाभिषेक प्रारंभ कर दिया। तड़के पांच बजे से अन्य श्रद्धालुओं ने भी पहुंचना शुरू कर दिया। इन्होंने कतारबद्ध होकर पूजा अर्चना करके भगवान आशुतोष का जलाभिषेक किया।

महानगर के लोगों ने काफी संख्या में हरिद्वार और ब्रजघाट से गंगाजल लाकर जलाभिषेक किया। यह लोग दोपहिया, चौपहिया वाहनों से आज तड़के गंगाजल लेकर विभिन्न मंदिरों में पहुंच गए और जलाभिषेक किया। इसके अलावा महानगर के सभी मंदिरों में भक्तों ने परिवार संग जलाभिषेक कर पूजा अर्चना की। भक्तों ने भोले बाबा को भांग, धतूरा और बेलपत्ती का प्रसाद चढ़ाकर जलाभिषेक किया। मंदिरों में महिला संकीर्तन मंडली द्वारा कीर्तन किया गया और महा आरती भी हुई। इस दौरान काफी मंदिरों को फूल-पत्तियों, रंग बिरंगी लाइट की झालरों और फलों से सजाया भी गया।

By editor

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