भाजपा सांसद रवि शंकर प्रसाद ने 7 अप्रैल को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की उस टिप्पणी की आलोचना की, जिसमें उन्होंने कहा था कि गुजरात के लोग अपनी अशिक्षा के कारण मूर्ख बन सकते हैं। प्रसाद ने कहा कि खरगे राष्ट्रीय पार्टी का नेतृत्व करने के योग्य नहीं हैं और उनसे सार्वजनिक माफी मांगने की मांग की। नई दिल्ली में भाजपा मुख्यालय में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए प्रसाद ने खर्गे की टिप्पणी को बेशर्मी की पराकाष्ठा बताया और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी से इस बयान से खुद को अलग करने का आह्वान किया।

रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि चुनाव आते-जाते रहते हैं, लेकिन क्या कांग्रेस अध्यक्ष ने सारी मर्यादाएं तोड़ दी हैं? मैं उनके शब्दों को दोहरा भी नहीं सकता। यह बेशर्मी और नीचता की पराकाष्ठा है। उनके शब्द न केवल अपमानजनक हैं बल्कि बेशर्म भी हैं। एक राष्ट्रीय पार्टी के अध्यक्ष के लिए किसी राज्य के लोगों को अनपढ़ कहना क्या उचित है? खरगे, क्या गांधी जी, सरदार पटेल, मोरारजी देसाई और विक्रम साराभाई अनपढ़ थे?

प्रसाद ने गुजरात की साक्षरता दर पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह 82 प्रतिशत है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में इसमें सुधार हुआ है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या खरगे की टिप्पणियां प्रधानमंत्री के प्रति घृणा से प्रेरित थीं और जोर देकर कहा कि खरगे को देश से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि भाजपा माफी की मांग करती है। क्या सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी पार्टी अध्यक्ष के बयान से सहमत हैं? अगर राहुल गांधी में समझदारी है, तो उन्हें इस टिप्पणी से खुद को अलग कर लेना चाहिए और पार्टी प्रमुख से माफी मांगने को कहना चाहिए। उन्होंने बिहार और उत्तर प्रदेश को निरक्षर तक कह दिया। क्या आप देश को बांटना चाहते हैं? वे कांग्रेस अध्यक्ष बनने के लायक नहीं हैं।

प्रसाद ने खरगे द्वारा भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को जहरीले सांप बताने की भी आलोचना की और उन पर मुस्लिम समुदाय की धार्मिक भावनाओं को भड़काकर सांप्रदायिक तनाव पैदा करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि क्या आप सांप्रदायिक तनाव पैदा कर रहे हैं? आपने मुस्लिम समुदाय की धार्मिक भावनाओं को भड़काकर खुलेआम और बेशर्मी से सांप्रदायिक आग को हवा दी है। राहुल गांधी के पूर्वज संघ की आलोचना करते रहे। हालांकि, संघ नई ऊंचाइयों पर पहुंच गया और उसके कई सदस्य अब सांसद हैं। देखिए आप अब कहां हैं? आपको समझना चाहिए कि जनता को ऐसे बयान पसंद नहीं आते।

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