काशी तमिल संगमम 3 : ​ तमिलनाडु के सुब्रमण्यम व डॉ. अब्दुल कलाम ने देश को एक सूत्र में पिरोया ः प्रो. शर्मा 

– पंडित ओंकारनाथ ठाकुर सभागार में आयोजित शैक्षणिक सत्र में नई शिक्षा नीति और मातृभाषा पर हुई चर्चा

वाराणसी, 16 फरवरी (हि.स.)। काशी तमिल संगमम के तीसरे संस्करण में भाग लेने आए तमिल छात्रों और लेखकों के समूह ने रविवार को बीएचयू में भ्रमण के बाद बौद्धिक श्रृंखला में आयोजित विशेष शैक्षणिक सत्र में भी भाग लिया। इस दौरान प्रो.आनंदवर्धन शर्मा ने काशी और तमिलनाडु के ऐतिहासिक संबंधों की चर्चा की। उन्होंने महान कवि सुब्रमण्यम भारती और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जैसे तमिलनाड़ु में अनेक महान व्यक्ति हुए हैं। उनके कार्य ने देश को एक सूत्र में पिरोने में अहम भूमिका निभाई। वहां के लेखकों ने भी स्थानीय भाषाओं में शैक्षणिक सामग्री तैयार करने में महत्वपूर्व भूमिका को निभाया है।

बीएचयू परिसर स्थित पंडित ओंकार नाथ ठाकुर सभागार में आयोजित विशेष शैक्षणिक सत्र में आईआईटी-बीएचयू के प्रो. आरके मिश्रा ने बताया कि नई शिक्षा नीति 2020 मातृभाषा में शिक्षा की अहमियत को रेखांकित करती है। आईआईटी-बीएचयू से शोध करने वाले डॉ. एस. अरुल ने विकसित भारत 2047 की परिकल्पना, आर्थिक विकास और सुशासन (गुड गवर्नेंस) पर चर्चा की। वाराणसी की शिक्षिका डॉ. रचना शर्मा ने बताया कि कैसे उत्तर प्रदेश सरकार ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सुधार किया है। सरकार के किए जा रहे सुधारों और योजनाओं से राज्य में शिक्षा क्षेत्र को नई रफ्तार मिल रही है। इनमें 73 नए कॉलेजों, तीन नए विश्वविद्यालयों की स्थापना और उच्च शिक्षण प्रोत्साहन निधि प्रमुख हैं। बीएचयू की छात्रा समाख्या पांडा ने काशी और तमिलनाडु के ऐतिहासिक संबंधों को बताया। छात्रा ने बीएचयू में हो रहा नवाचार व अनुसंधान को विस्तार से चर्चा की। डॉ. नागेंद्र सिंह ने ऋषि अगस्त्य के जीवन और इस वर्ष की संगमम की थीम पर व्याख्यान दिया।

इसक दौरान तमिलनाडु से आए प्रतिनिधियों ने भी अपने अनुभव व विचार साझा किये। अरुण वेंकट ने वाराणसी के सांसद और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व से काशी तमिल संगमम जैसा भव्य कार्यक्रम हो रहा है । जिसके तहत प्रतिभागियों को अनुभव करने का अवसर मिला, जिसे वे केवल सुनते आए थे। तमिल शिक्षिका भाग्यलक्ष्मी ने कहा कि काशी तमिल संगमम में वे जो देख सुन रही हैं, उसे अपने विद्यार्थियों के साथ भी साझा करेंगी। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की परिकल्पना को साकार कर रहा है।

सत्र में तमिल विद्वानों, शिक्षकों, लेखकों और विद्यार्थियों ने नई शिक्षा नीति, मातृभाषा, संगमम साहित्य और विकसित भारत जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपनी बात रखने के साथ ही स्थानीय विद्वानों और शिक्षकों को भी सुना।

बीएचयू परिसर को देख अभिभूत हुए तमिल छात्र-लेखक

इससे पहले शिक्षक, विद्यार्थियों और लेखकों के 205 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने बीएचयू भारत कला भवन का भ्रमण किया। छात्रों व लेखकों ने भवन में भव्य पेंटिंग गैलरी, मूर्तिकला गैलरी और मालवीय गैलरी का अवलोकन किया। प्रतिनिधिमंडल ने आईआईटी-बीएचयू परिसर का दौरा किया, जहां सदस्यों ने अनुसंधान, नवाचार, खेल संरचनाओं और अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं को देखा। प्रतिनिधिमंडल में तंजावुर विश्वविद्यालय, पांडिचेरी विश्वविद्यालय और भारती दास कॉलेज के छात्रों के सवालों और जिज्ञासा का समाधान शिक्षकों ने किया। परिसर में अतिथियों का स्वागत बीएचयू के उपनिदेशक डॉ. निशांत ने किया। इस दौरान छात्र अधिष्ठाता प्रो. अनुपम कुमार नेमा, सहायक क्यूरेटर डॉ. अनिल कुमार सिंह, डॉ. डीबी सिंह तथा दीपक भारतन ने अतिथियों का मार्गदर्शन किया।

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