मुज़फ्फरनगर। राष्ट्रगीत वंदे मातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में शहर में स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय में शुक्रवार को भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यालय की बालिकाओं ने देशभक्ति के जोश और उमंग से ओत-प्रोत होकर वंदे मातरम का सामूहिक गायन किया। इस अवसर पर पूरा विद्यालय परिसर राष्ट्रभक्ति की भावना से गूंज उठा।कार्यक्रम का आयोजन जिलाधिकारी उमेश मिश्रा और मुख्य विकास अधिकारी कण्डारकर कमलकिशोर देशभूषण के निर्देशन में किया गया। अपर जिलाधिकारी प्रशासन संजय कुमार सिंह तथा अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व गजेंद्र कुमार के मार्गदर्शन में, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी संदीप कुमार के नेतृत्व और डॉ. राजीव कुमार के संयोजन में यह ऐतिहासिक कार्यक्रम संपन्न हुआ।

इस अवसर पर उपस्थित अधिकारियों, शिक्षकों और छात्राओं ने राष्ट्रगीत के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वंदे मातरम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का वह स्वर रहा, जिसने देश के प्रत्येक नागरिक में आज़ादी की भावना को प्रज्वलित किया। यह गीत मातृभूमि को शक्ति, समृद्धि और दिव्यता का प्रतीक मानते हुए भारत की एकता और आत्मगौरव का प्रतीक बना।वक्ताओं ने बताया कि वंदे मातरम की रचना बंकिमचंद्र चटोपाध्याय ने 7 नवंबर 1875 को अक्षय नवमी के पावन अवसर पर की थी। इसे पहली बार साहित्यिक पत्रिका बंगदर्शन में उनके प्रसिद्ध उपन्यास आनंदमठ के अंश के रूप में प्रकाशित किया गया था। वर्ष 1896 में रविंद्रनाथ टैगोर ने इसका स्वर वाचन किया था, जबकि वर्ष 1950 में भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने इसे राष्ट्रगीत का दर्जा प्रदान किया।इस गीत ने भारतीय जनमानस में मातृभूमि के प्रति समर्पण और त्याग की भावना को सशक्त रूप से जागृत किया।

स्वतंत्रता संग्राम के दौरान वंदे मातरम एक नारे से अधिक, भारत के स्वाभिमान का प्रतीक बन गया।कार्यक्रम के अंत में विद्यालय की छात्राओं ने एक स्वर में वंदे मातरम का गायन करते हुए देश के वीर स्वतंत्रता सेनानियों को नमन किया। आयोजन में बालिकाओं का जोश और अनुशासन देखने योग्य था। उपस्थित अधिकारियों, शिक्षकों और बालिकाओं ने एक सुर में कहा कि यह गौरव का क्षण है जब हम राष्ट्रगीत के रचनाकाल के 150 वर्ष पूरे होने का उत्सव मना रहे हैं।इस अवसर पर विद्यालय परिसर तिरंगे झंडों और सजावट से सुसज्जित था। छात्राओं ने देशभक्ति गीतों पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ भी दीं, जिससे माहौल उत्साह और गर्व से भर गया।
