अमरीकी राष्ट्रपति जो बाइडेन G20 शिखर सम्मेलन में भाग लेने 3 दिन के दौरे पर भारत पहुंच गए हैं। दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पर उनका एयरफोर्स वन प्लेन लैंड हुए। केंद्रीय मंत्री जनरल वीके सिंह ने यहां उनका स्वागत किया। जो बाइडेन ने इसके बाद भारत में अमरीकी राजदूत एरिक गार्सेटी और उनकी बेटी से भी मुलाकात की। थोड़ी देर में अमरीकी राष्ट्रपति जो बाइडेन PM मोदी के आवास पर द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इस दौरान दोनों देशों के बीच सिविल न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा होने कि बात सामने आ रही है। इसके अलावा छोटे मॉड्यूलर परमाणु रिएक्टरों पर भी समझौता हो सकता है।

G20 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए 19 देशों के प्रतिनिधि आ रहे हैं। इसके लिए राजधानी दिल्ली में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। बता दें कि इस दौरान दिल्ली में स्थानीय पुलिस के 50 हजार जवान, NSG, CRPF, CAPF और आर्मी के करीब 80 हजार जवान तैनात किए गए हैं। बड़ी संख्या में बुलेट प्रूफ गाड़ियां, एंटी ड्रोन सिस्टम, एयर डिफेंस सिस्टम, फाइटर जेट राफेल, एयरफोर्स और सेना के हेलिकॉप्टर, हवा में 80 किमी तक मार करने वाली मिसाइल, चेहरा पहचानने वाले कैमरे, दिल्ली के आसपास के 4 एयरपोर्ट अलर्ट मोड पर रखे गए हैं। आवारा पशुओं को भी कई महत्वपूर्ण स्थानों से खाली कराया गया है। कई रूटों को डाइवर्ट किया गया है। दिल्ली पुलिस के अधिकारी के मुताबिक पहली बार राजधानी में सुरक्षा का इतना बड़ा इंतजाम किया गया है।


“वसुधैव कुटुम्बकम – हमारी भारतीय संस्कृति के इन दो शब्दों में एक गहरा दार्शनिक विचार समाहित है। इसका अर्थ है, ‘पूरी दुनिया एक परिवार है’। यह एक ऐसा सर्वव्यापी दृष्टिकोण है जो हमें एक सार्वभौमिक परिवार के रूप में प्रगति करने के लिए प्रोत्साहित करता है। एक ऐसा परिवार जिसमें सीमा, भाषा और विचारधारा का कोई बंधन ना हो। जी-20 की भारत की अध्यक्षता के दौरान, यह विचार मानव-केंद्रित प्रगति के आह्वान के रूप में प्रकट हुआ है। हम One Earth के रूप में, मानव जीवन को बेहतर बनाने के लिए एक साथ आ रहे हैं। हम One Family के रूप में विकास के लिए एक-दूसरे के सहयोगी बन रहे हैं और One Future के लिए हम एक साझा उज्जवल भविष्य की ओर एक साथ आगे बढ़ रहे हैं। कोरोना वैश्विक महामारी के बाद की विश्व व्यवस्था इससे पहले की दुनिया से बहुत अलग है। कई अन्य बातों के अलावा, तीन महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं। पहला, इस बात का एहसास बढ़ रहा है कि दुनिया के जीडीपी-केंद्रित दृष्टिकोण से हटकर मानव-केंद्रित दृष्टिकोण की ओर बढ़ने की आवश्यकता है। दूसरा, दुनिया ग्लोबल सप्लाई चेन में सुदृढ़ता और विश्वसनीयता के महत्व को पहचान रही है। तीसरा, वैश्विक संस्थानों में सुधार के माध्यम से बहुपक्षवाद को बढ़ावा देने का सामूहिक आह्वान सामने है।जी-20 की हमारी अध्यक्षता ने इन बदलावों में उत्प्रेरक की भूमिका निभाई है।”

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