पद यात्रा समिति के अध्यक्ष सुनील लिंगवाल और संयोजक अनुसूया प्रसाद सुंद्रियाल ने बताया कि रामायण काल से जुड़े फलस्वाड़ी गांव स्थित सीतामाता समाधि स्थल, देवप्रयाग श्री रघुनाथ मंदिर, देवल गांव स्थित लक्ष्मण मंदिर समूह, कोट महादेव और वाल्मीकि आश्रम कोटसाड़ा को विकसित करने व विश्वपटल पर पहचान दिलाने के लिए दो दिवसीय यात्रा की जा रही हैं। यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
शनिवार को पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत ढोल दमाऊ, ध्वज और कलश के साथ यात्रा वैद्यगांव से शुरू हुई। इसके बाद यात्रा सल्डा गांव में सीता मंदिर पहुंची। जहां श्रद्धालुओं ने यात्रा का भव्य स्वागत किया। इस दौरान यात्रा देवप्रयाग संगम तट पर पहुंची। जहां पर पूजा अर्चना कर रघुनाथ मंदिर में दर्शन किए।
इस दौरान विदाकोटी गोविंद मंदिर में यात्रा का आगमन स्वागत, पूजा दर्शन, कुलासू गांव में यात्रा आगमन, सीतासैंण मुछियाली गांव सीता मंदिर में पूजा की गई। यात्रा खोलाचौंरी, डांडापानी, कठूड़, नवन होते हुए लक्ष्मण मंदिर देवल गांव पहुंची। पद यात्रा समिति के अध्यक्ष सुनील लिंगवाल और संयोजक अनुसूया प्रसाद सुंद्रियाल ने बताया कि रविवार को वैद्य गांव से यात्रा प्रस्थान कर कोटसाड़ा गांव वाल्मीकि मंदिर पहुंचेगी। इसके बाद फलस्वाड़ी गांव में सीतामाता समाधिस्थल में शिला रूप में सीता माता के दर्शन कर यात्रा समाप्त होगी।
