मुजफ्फरनगर | शहर में ई-रिक्शा रूट निर्धारण को लेकर हालात गरमा गए हैं। यातायात पुलिस प्रशासन द्वारा लागू की गई नई व्यवस्था के विरोध में सोमवार को बड़ी संख्या में ई-रिक्शा चालक अपनी रिक्शा छोड़कर कचहरी परिसर में धरने पर बैठ गए। सुबह से ही जीआईसी मैदान के बाहर चालकों की भीड़ जुटनी शुरू हुई थी, लेकिन प्रशासनिक बातचीत के बाद प्रदर्शनकारियों ने कचहरी परिसर में डेरा डाल दिया।
फिलहाल शहर के विभिन्न इलाकों से लगातार चालक यहां पहुंच रहे हैं और भीड़ हर घंटे बढ़ती जा रही है।धरने के दौरान कई चालक सर्कुलर रोड पर सवारी ढो रहे रिक्शों को रोकते और यात्रियों को बीच रास्ते में उतारते भी नजर आए। उनका कहना था कि जब तक सभी साथी चालक विरोध में शामिल नहीं होंगे, आंदोलन का असर कम नहीं पड़ेगा।

ई-रिक्शा मजदूर यूनियन की मांगें इस प्रकार हैं—
•• ई-रिक्शा रूट का सरकारी निर्धारण बंद किया जाए।
••फिटनेस के नाम पर की जा रही अवैध वसूली पर रोक लगे।
••रोडवेज अड्डा शहर से बाहर स्थानांतरित किया जाए।
••ई-रिक्शा चालकों की बेटियों के विवाह हेतु आर्थिक अनुदान दिया जाए।
••दुर्घटना होने पर ई-रिक्शा चालकों को उचित क्लेम दिलाया जाए
।••सभी चालकों का पूर्ण जीवन बीमा कराया जाए।
••लाइसेंस और इंश्योरेंस में होने वाली अवैध वसूली व उत्पीड़न बंद हो।
••ई-रिक्शा व्यवसाय को एक “उद्योग” के रूप में मान्यता प्रदान की जाए।

प्रशासन की ओर से साफ किया गया है कि 2 अक्टूबर से रूट लॉटरी प्रणाली लागू होगी और ई-रिक्शा चालक केवल उसी रूट पर संचालन कर पाएंगे, जो उन्हें आवंटित होगा। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाने के लिए अनिवार्य है।वहीं, चालकों का कहना है कि रूट निर्धारण से उनकी रोज़ी-रोटी खतरे में पड़ जाएगी। कचहरी परिसर में जारी धरने के बीच स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और प्रदर्शनकारी अपने निर्णय पर अड़े हुए हैं।
