जिले में आमजन की शिकायतों के समाधान में हो रही देरी और संवेदनशीलता की लगातार उपेक्षा पर जिलाधिकारी प्रशान्त आर्य ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने कहा है कि अधिकारी फोन उठाकर सबसे पहले नागरिकों को अंतरिम राहत उपलब्ध कराएं और फिर स्थायी समाधान की दिशा में काम शुरू करें।

जिलाधिकारी कार्यालय से जारी आदेश में कहा गया है कि कई जिला एवं खण्ड स्तरीय अधिकारियों की ओर से जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों के फोन रिसीव नहीं किए जा रहे, जिससे शिकायतकर्ताओं को अत्यधिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने इसे बेहद खेदजनक और लापरवाहीपूर्ण करार दिया है।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि फोन न उठाने के कारण लोगों को छोटी-छोटी शिकायतों एवं समस्याओं के निस्तारण के लिए अनावश्यक रूप से जिला व खण्ड मुख्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इससे न केवल सार्वजनिक समय की बबार्दी होती है, बल्कि प्रशासन की छवि और भरोसे पर भी आंच आती है। आदेश में उल्लेख है कि यह रवैया अधिकारियों की आमजन की समस्याओं के प्रति असंवेदनशीलता को दशार्ता है, जिसे किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जायेगा।

जिलाधिकारी ने सभी कार्यालयाध्यक्षों को निर्देशित किया है कि वे सामान्य नागरिकों और जनप्रतिनिधियों के फोन अवश्य रिसीव करें तथा शिकायतों का त्वरित निस्तारण सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि अधिकारी जनता से संवाद बढ़ाएं और समस्या समाधान में देरी हरगिज न होने दें। साथ ही, आदेश में चेतावनी दी गई है कि यदि भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति पाई जाती है, या फिर फोन न उठाने की शिकायतें प्राप्त होती हैं, तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध उनके विभागाध्यक्ष अथवा शासन को कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए संस्तुति भेजी जाएगी।

जिलाधिकारी का यह कदम प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक जवाबदेह और जनसरोकारों के प्रति संवेदनशील बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

By editor

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