मुज़फ्फरनगर | दिवाली की रौनक के बीच दिल्ली-एनसीआर की हवा जहरीली हो गई है। सोमवार-मंगलवार की दरमियानी रात दिल्ली में धुंध की मोटी चादर छाई रही और औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 531 दर्ज किया गया, जो राष्ट्रीय औसत से करीब 1.8 गुना अधिक है। वहीं मुज़फ्फरनगर का एयर इंडेक्स भी अनहेल्दी श्रेणी में पहुँच गया, जहाँ AQI 153 रिकॉर्ड किया गया।मुज़फ्फरनगर के न्यू मंडी क्षेत्र में प्रदूषण का प्रमुख कारण PM2.5 कण पाए गए, जिनकी मात्रा 58.3 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर दर्ज की गई। तापमान 21 डिग्री, आर्द्रता 72% और हवा की गति 7 किमी प्रति घंटा रही। यह आंकड़े सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) के स्टेशन से प्राप्त हुए हैं।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के ‘समीर’ ऐप के अनुसार, मंगलवार 21 अक्टूबर की सुबह दिल्ली के 38 निगरानी स्टेशनों में से 34 पर वायु गुणवत्ता ‘रेड जोन’ यानी बहुत खराब से गंभीर श्रेणी में रही।नरेला में AQI 551, वजीरपुर में 408, आनंद विहार में 404 और अशोक विहार में 386 दर्ज हुआ। वहीं द्वारका का स्तर 417 और रोहिणी का 367 रहा।नोएडा में सेक्टर-125 पर AQI 326 और सेक्टर-116 पर 340 दर्ज हुआ, जबकि गुरुग्राम के सेक्टर-51 में 346 और NISE क्षेत्र में 357 रहा।
गाजियाबाद के लोनी व इंदिरापुरम में भी AQI 329 से ऊपर रहा।मौसम विभाग के अनुसार, दीपावली की शाम हवा न चलने से जहरीली गैसें ऊपर नहीं उठ सकीं, जिससे प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ा। राजधानी के कई इलाकों में घनी धुंध की परत सुबह तक छाई रही।सुप्रीम कोर्ट ने 15 अक्टूबर को कुछ शर्तों के साथ दिल्ली-एनसीआर में हरित पटाखों की बिक्री और उपयोग की अनुमति दी थी। कोर्ट ने दिवाली से एक दिन पहले और त्योहार के दिन सुबह 6 बजे से शाम 7 बजे तथा रात 8 से 10 बजे तक ही इन पटाखों के उपयोग की छूट दी थी| वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने बढ़ते प्रदूषण के मद्देनज़र ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का दूसरा चरण लागू कर दिया है। इसके तहत दिल्ली-एनसीआर में डीजल जनरेटरों पर रोक, पार्किंग शुल्क में वृद्धि, और निजी वाहनों के उपयोग को कम करने के निर्देश दिए गए हैं।
सीएनजी, बायो गैस, एलपीजी या नैचुरल गैस से चलने वाले जेनरेटरों को छूट दी गई है।निर्णय समर्थन प्रणाली (DSS) के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में सोमवार को वायु प्रदूषण में परिवहन क्षेत्र का योगदान 15.6 प्रतिशत और उद्योगों सहित अन्य स्रोतों का योगदान 23.3 प्रतिशत रहा।दिल्ली-एनसीआर के साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी दिवाली की रात वायु गुणवत्ता चिंताजनक रही। मुज़फ्फरनगर की हवा भी “अनहेल्दी” स्तर पर पहुँच चुकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मौसम में बदलाव और हवा की गति में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में प्रदूषण का स्तर और खतरनाक हो सकता है।
