नई दिल्ली, 25 फरवरी । दिल्ली उच्च न्यायालय ने जनकपुरी में दिल्ली जल बोर्ड के खुले गड्ढे में गिरकर बाइक सवार की मौत के मामले में दो ठेकेदारों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की पीठ ने कहा कि सार्वजनिक सड़कों को मौत का फंदा बनाने की इजाजत नहीं दी जा सकती है।
उच्च न्यायालय ने कहा कि दोनों ठेकेदार घटनास्थल की पर्याप्त सुरक्षा के लिए जिम्मेदार थे। इसके अलावा वे किसी व्यक्ति के गड्ढे में गिरने पर जरुरी सुरक्षा उपकरण की उपलब्धता और पुलिस और चिकित्सा प्राधिकार को सूचना देने के लिए भी जिम्मेदार थे। कोर्ट ने कहा कि गड्ढा करीब 20 फीट लंबा, 13 फीट चौड़ा और 14 फीट गहरा था। ये गड्ढा व्यस्त सड़क के बीचो-बीच खोदा गया था। दिल्ली के लोगों की जान इस तरह जाने नहीं दी जा सकती है। इसके पहले द्वारका कोर्ट ने 18 फरवरी को इन दोनों ठेकेदारों हिमांशु गुप्ता और कवीश गुप्ता की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
दरअसल,, 5 और 6 फरवरी की दरम्यानी रात को निजी बैंक में काम करने वाले एक कर्मचारी कमल ध्यानी अपने घर लौट रहे थे, जहां वो एक दिल्ली जल बोर्ड के खुले गड्ढे में बाइक समेत गिर गए।
इसी मामले में द्वारका कोर्ट के मजिस्ट्रेट कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से पूरे मामले की विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट तलब की है। जुडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास हरजोत सिंह औजला ने संबंधित एसएचओ से विस्तृत जांच रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
