उद्घाटन सत्र में डॉ. ओम प्रकाश, सहायक निदेशक इंचार्ज, रानीखेत; डॉ. अनिल कुमार, प्राचार्य, पंतजलि आयुर्वेद कॉलेज; डॉ. गिरीश के. जे., उप-प्राचार्य, पंतजलि आयुर्वेद कॉलेज तथा डॉ. तरुण कुमार, अनुसंधान अधिकारी रानीखेत उपस्थित रहे।

विशेषज्ञ वक्ताओं ने आयुर्वेदिक औषधियों के संभावित दुष्प्रभावों की पहचान, उनके दस्तावेजीकरण एवं चिकित्सकों में रिपोर्टिंग की संस्कृति विकसित करने की आवश्यकता पर विस्तार से प्रकाश डाला।

आयोजकों ने बताया कि इस प्रकार की कार्यशालाएं न केवल आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति की वैज्ञानिकता एवं विश्वसनीयता को सुदृढ़ करेंगी, बल्कि रोगियों के हित में सुरक्षित उपचार सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होंगी।

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