इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने नोएडा स्पोर्ट्स सिटी घोटाले से संबंधित सीबीआई और ईडी जांच के आदेश दिए हैं। अदालत के इस निर्णय के बाद सीबीआई ने मामले में तीन एफआईआर दर्ज की हैं और अपनी जांच शुरू कर दी है। ये एफआईआर क्रमशः लॉजिक्स इन्फ्रा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, लोटस ग्रीन कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड और जनायडू एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ दर्ज की गई हैं। इस संदर्भ में नोएडा प्राधिकरण ने भी 17 बिल्डरों को नोटिस जारी किया है जो कि एससी-02 सेक्टर-150 से संबंधित 21 भूखंडों में से 17 भूखंडों पर कार्यरत हैं। इन बिल्डरों पर कुल मिलाकर लगभग 3145.56 करोड़ रुपये का बकाया है, जबकि पूरे मामले की जांच 9000 करोड़ रुपये के घोटाले के संदर्भ में की जा रही है।

स्पोर्ट्स सिटी परियोजना में संलग्न तीन प्रमुख बिल्डरों के खिलाफ आरोप है कि उन्होंने 2011 से 2017 के बीच घर खरीदारों के पैसे को हड़पने के लिए मिलकर काम किया। यह आरोपित की गई गतिविधियों में बिल्डरों, कंसोर्टियम और नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों के बीच सामंजस्य और अनुचित लेन-देन शामिल है। इसके परिणामस्वरूप इन बिल्डरों को जारी किया गया नोटिस और पूर्ण आर्थिक अनियमितताओं का खुलासा किया गया है। नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सीएजी) की एक ऑडिट रिपोर्ट में इस घोटाले की गंभीरता का उल्लेख किया गया है, जिसमें 9000 करोड़ रुपये के नुकसान का संकेत दिया गया है।

सीएजी द्वारा किए गए ऑडिट में यह पाया गया कि डेवलपर्स को भूमि न्यूनतम कीमत पर दी गई थी और आरोप है कि उन्होंने नोएडा प्राधिकरण को दरकिनार करते हुए स्वामित्व को बिना अनुमति के हस्तांतरित किया। यह भी सामने आया है कि लीज प्रीमियम, जुर्माना, ट्रांसफर चार्ज जैसी आवश्यक धनराशियां भी उपलब्ध नहीं कराई गईं। औसत और उच्च स्तर की खेल सुविधाओं का निर्माण न होने के बावजूद, संबंधित बिल्डरों को अधिभोग प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए, जो कि गंभीर अनियमितता के रूप में देखी जा रही है।

स्पोर्ट्स सिटी परियोजना का मुख्य उद्देश्य नोएडा में खेल और मनोरंजन के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करना था। इस परियोजना के तहत विभिन्न खेलों और सामुदायिक सुविधाओं के विकास की योजना थी, जिससे न केवल स्थानीय निवासियों को लाभ होना था, बल्कि नोएडा को एक प्रमुख खेल हब के रूप में स्थापित करना भी था। लेकिन विकास के चरण में सामने आ रहे ये अनियमितताएं एक बड़ा प्रश्न खड़ा करती हैं कि क्या यह परियोजना अपनी मूल भावना के अनुसार कार्य कर पा रही है या नहीं।

निष्कर्षतः, नोएडा स्पोर्ट्स सिटी घोटाले की जांच मील का पत्थर साबित हो सकती है और यह दर्शाती है कि सरकारी प्राधिकरण और बिल्डर्स के बीच पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता है। न्यायालय का यह कदम यह सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति है कि संबंधित पक्षों के बीच उचित कानूनी कार्रवाई की जा सके और भविष्य में ऐसी अनियमितताओं को रोकने के उपाय किए जा सकें।

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