इसको कहते है निस्वार्थ सेवा…. अस्पताल से छुट्टी मिलते ही क्रांतिकारी शालू सैनी लावारिस की बनी वारिस, दी मुखाग्नि
मुज़फ्फरनगर। यूं तो समाज सेवा काफी लोग करते आ रहे हैं, मगर कुछ समाज सेवा ऐसी होती हैं जो सबसे अलग दिखाई देती है ऐसी ही समाज सेवा जनपद की…






