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सीएक्यूएम ने एक बयान में बताया कि इन पावर प्लांट्स में फसल अवशेष (पराली) से बने बायोमास पेलेट/ब्रिकेट को कोयले के साथ जलाने के नियमों का सही से पालन नहीं किया गया। जबकि नियमों के अनुसार कोयला आधारित पावर प्लांट्स को कम से कम 5 प्रतिशत बायोमास कोयले के साथ मिलाकर जलाना जरूरी है।

2024–25 के लिए कम से कम 3 प्रतिशत बायोमास इस्तेमाल करना अनिवार्य था, ताकि जुर्माना न लगे

लेकिन 6 पावर प्लांट्स तय सीमा से काफी कम बायोमास इस्तेमाल कर रहे थे।

इन पावर प्लांट्स में तलवंडी साबो पावर (पंजाब) जिसपर लगभग 33.02 करोड़

रुपये, पानीपत थर्मल पावर स्टेशन (हरियाणा) पर लगभग 8.98 करोड़

रुपये, दीनबंधु छोटू राम थर्मल पावर स्टेशन (हरियाणा) पर लगभग 6.69 करोड़ रुपये,

राजीव गांधी थर्मल पावर प्लांट (हरियाणा) पर लगभग 5.55 करोड़

रुपये, गुरु हरगोबिंद थर्मल पावर प्लांट (पंजाब) पर लगभग 4.87 करोड़

रुपये, हरदुआगंज थर्मल पावर स्टेशन (उत्तर प्रदेश) पर लगभग 2.74 करोड़

रुपये जुर्माना लगाया गया।

कुल मिलाकर जुर्माने की राशि

करीब 61.85 करोड़ रुपये की है।

सीएक्यूएम ने बताया कि इस कार्रवाई का मकसद पराली जलाने की समस्या को कम करना, दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण घटाना, किसानों की पराली का सही उपयोग करना है।

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By editor

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