झांसी, 13 अगस्त । बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झांसी के 30वें दीक्षांत समारोह एवं स्वर्ण जयंती वर्ष 2025 के उपलक्ष्य में आयोजित दीक्षांत उत्सव श्रृंखला के अंतर्गत ललित कला संस्थान द्वारा संचालित भारतीय लोक कला पर आधारित “लोक कला पर्व” सात दिवसीय कार्यशाला के तृतीय दिवस रंगों और रेखाओं का सजीव समन्वय देखने को मिला। दिनभर संस्थान के विद्यार्थी और शिक्षकगण चित्रांकन में तल्लीन रहे, वहीं बुन्देलखण्ड की लोक कला चितेरी और कालीघाट के पटचित्र विशेष आकर्षण का केंद्र बने।

कार्यशाला में उत्तर प्रदेश की चितेरी शैली पर नरेन्द्र ने गणेश पूजन का पारंपरिक चित्रांकन प्रस्तुत किया। मध्य प्रदेश की गोंड शैली में शिवानी कुशवाहा ने प्रकृति और पशु–पक्षियों के सूक्ष्म बिंब उकेरे। उड़ीसा के पटचित्र विषय पर सृष्टि, चंचल साहू और मोनिका ने भगवान जगन्नाथ तथा कृष्ण की रासलीला का मनोहारी चित्रण किया। इसी क्रम में आंध्रप्रदेश की कलमकारी पर चंचल मालवीय ने सरस्वती, जबकि रूबी साहू ने कृष्ण–राधा के वन-विहार का सधी हुई रेखाओं में सजीव निरूपण किया। महाराष्ट्र की वर्ली कला में दीपिका राजपूत ने जनजीवन के दृश्य रचे, जिनमें रंगों का संतुलित सामंजस्य दर्शनीय रहा। कालीघाट के पटचित्रों की तीव्र रेखाभाषा और भावपूर्ण मुखाकृतियाँ भी दर्शकों का ध्यान खींचती रहीं।

युवा प्रतिभागियों का लोकशैली में किया गया सधा चित्रांकन ऐसा प्रतीत हुआ मानो किसी पारंगत कलाकार ने कैनवास पर परंपरा की संवेदना उकेरी हो। इस अवसर पर प्रो. आर. के. सैनी ने विद्यार्थियों से कहा कि छात्र–जीवन के उतार–चढ़ाव के बीच कला के प्रति लगाव और लक्ष्य की प्राप्ति हेतु निरंतर कठोर परिश्रम ही सफलता का सूत्र है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को आशीर्वाद दिया और निरंतर अभ्यास की प्रेरणा दी।

कार्यक्रम की संयोजक डॉ. श्वेता पाण्डेय ने प्रतिभागियों का परिचय कराते हुए उनकी कार्यशैली पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत की प्रमुख लोक कलाओं को एक साथ चित्रतल पर साकार होते देखना अद्वितीय और अविस्मरणीय अनुभव है। कार्यशाला में 55 से अधिक वरिष्ठ एवं युवा कलाकार सक्रिय भागीदारी कर रहे हैं।

इस अवसर पर डॉ. सुनीता, डॉ. अजय कुमार गुप्ता, डॉ. दिलीप कुमार, डॉ. बृजेश कुमार, डॉ. संतोष कुमार, डॉ. रानी शर्मा, डॉ. अंकिता शर्मा, श्री गजेन्द्र सिंह, काजल ओझा, यामिनी सोंधिया सहित संस्थान के अनेक विद्यार्थी उपस्थित रहे। आयोजकों के अनुसार आगामी दिवसों में भी लोककलाओं की विविध शैलियों पर केंद्रित रचनात्मक अभ्यास और प्रदर्शन जारी रहेगा।

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