BSP के पूर्व मंत्री पारसनाथ मौर्य का आज लखनऊ में निधन हो गया है। 83 साल की उम्र में उन्होंने सिविल अस्पताल में अंतिम सांस ली। आज जौनपुर में उनका अंतिम संस्कार बौद्ध धर्म के रीति रिवाज के अनुसार किया जाएगा।
पूर्व मंत्री पारसनाथ मौर्या तत्कालीन CM मायावती की सरकार में राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष थे। मायावती सरकार के सत्ता से हटने के बाद भी वह बसपा में ही बने रहे। इतना ही नहीं, पूर्व मंत्री पारसनाथ मौर्या ने सपा के तत्कालीन मुख्यमंत्री स्व. मुलायम सिंह यादव के साथ दलितों, पिछड़ों शोषितों को जगाने में लंबे समय तक देश के विभिन्न प्रांतों में आंदोलन चलाया।
साल 1998 के लोकसभा चुनाव में जौनपुर संसदीय सीट से BSP के प्रत्याशी के रूप में उन्होंने चुनाव लड़ा था। उस दौरान BJP से राजकेशर सिंह और SP से पारसनाथ यादव प्रत्याशी थे। हालांकि, इस लोकसभा चुनाव में पारसनाथ यादव को जीत हासिल हुई थी।
बौद्ध धर्म आंदोलन के प्रणेता रहे पारसनाथ मौर्य को साल 1999 के लोकसभा चुनाव में मायावती ने अमेठी लोकसभा सीट से कांग्रेस की तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ाया था।

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