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नई दिल्ली, 04 अप्रैल । केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने मैसूर में जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (बीआईआरएसी)- बायोनेस्’ इन्क्यूबेशन सेंटर का उद्घाटन किया। इस पहल से देश में रिसर्च को बाजार से जोड़ने की दिशा में मदद मिलेगी। यह अत्याधुनिक इन्क्यूबेशन सेंटर फूड स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए तैयार किया गया है, जहां उन्हें आधुनिक लैब, साझा इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इसका उद्देश्य वैज्ञानिक शोध को व्यावसायिक उत्पादों में बदलना और स्टार्टअप्स को शुरुआती चरण से लेकर बाजार तक पहुंचने में मदद करना है।

कार्यक्रम के दौरान केन्द्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह ने स्टार्टअप्स और उद्यमियों से बातचीत करते हुए कहा कि आज के दौर में स्टार्टअप शुरू करना पहले की तुलना में आसान हो गया है, लेकिन उसे लंबे समय तक बरकरार रखना सबसे बड़ी चुनौती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि रिसर्च संस्थानों और इंडस्ट्री के बीच मजबूत तालमेल जरूरी है, ताकि नवाचार को बाजार की जरूरतों के अनुरूप ढाला जा सके। उन्होंने रेडी-टू-ईट और कंवीनियंस फूड जैसे क्षेत्रों में संभावनाओं को भी रेखांकित किया।

विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी मंत्रालय ने शनिवार को विज्ञप्ति जारी कर बताया कि मार्च 2026 तक इस बायोनेस्ट सुविधा के तहत 26 स्टार्टअप्स को सहायता दी जा चुकी है। जिनमें कई फिजिकल और हाइब्रिड इन्क्यूबेट्स शामिल हैं। इन स्टार्टअप्स ने मिलकर 12 पेटेंट दाखिल किए हैं और कई उत्पाद बाजार में लॉन्च किए जा चुके हैं। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि भारत में फूड और बायोटेक सेक्टर तेजी से नवाचार की ओर बढ़ रहा है। यह दर्शाता है कि फूड सेक्टर अब पारंपरिक सीमाओं से आगे बढ़कर हाई-वैल्यू और साइंस-ड्रिवन क्षेत्रों की ओर अग्रसर हो रहा है।

इस मौके पर चार समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए और दो नए उत्पाद भी लॉन्च किए गए। साथ ही, सीएफटीआरआई के 75 साल पूरे होने पर विशेष प्रकाशन और स्मारक सामग्री भी जारी की गई।

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