कश्मीर के पहलगाम क्षेत्र में हुई एक दुर्भाग्यपूर्ण आतंकी घटना ने कई परिवारों को दुखी किया है, जिसमें कानपुर के शुभम द्विवेदी भी शामिल हैं। शुभम की दुखद मृत्यु पर उनके सभी परिचित और मित्र चौंक गए हैं। उनका कहना है कि शुभम ऐसा व्यक्ति था जो किसी से भी बात करता था और सबको अपना मुरीद बना लेता था। उनके दोस्त निष्कर्ष गुप्ता ने कहा, “शुभम कश्मीर जाने से एक दिन पहले मिले थे। उन्होंने कहा था कि लौटने के बाद पार्टी करेंगे, लेकिन अब वह कभी लौटेगा नहीं।” यह बयान शुभम के अनोखे व्यक्तित्व को दर्शाता है, जो हमेशा दोस्ताना और सकारात्मक बने रहते थे।
शुभम द्विवेदी ने 2012 में गुरु हरराय एकेडमी, सनिगवां से इंटरमीडिएट पास किया था। स्कूल में उनकी मृत्यु के बाद शोक का माहौल है। शिक्षकों ने दो मिनट का मौन रखकर शुभम की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। शिक्षिका मधु मिश्रा ने बताया कि वह शुभम की क्लास टीचर थीं, और उनके बड़े होनहार होने की प्रशंसा की। मनोज कुमार तिवारी, जो कंप्यूटर साइंस के शिक्षक हैं, ने भी शुभम के परिवार को शांति और सौम्य स्वभाव वाला बताया। उनका परिवार भी इसी तरह का है, जिससे यह अधिक दुखदायी हो गया है।
प्रधानाचार्य मोनिका गुप्ता ने कहा कि शुभम ने 2008 में स्कूल में प्रवेश लिया था और वह न केवल पढ़ाई में बल्कि अन्य गतिविधियों में भी बहुत सक्रिय था। स्कूल के छात्रों और शिक्षकों ने मिलकर शुभम को श्रद्धांजलि दी, जिससे पता चलता है कि उनकी शख्सियत कितनी प्रभावित करने वाली थी। उनके साथी भी उनकी मौत से बहुत शोकित हैं और उनकी यादों को संजोए हुए हैं, जिससे यह दर्शित होता है कि शुभम अपने विश्वसनीय और दोस्तों के साथ कितने करीबी रिश्ते बनाए रखते थे।
शुभम ने गौरहरि सिंघानिया मैनेजमेंट कॉलेज से 2015-17 में एमबीए किया, जहाँ उनके प्रोफेसर देवेंद्र जायसवाल ने बताया कि शुभम के मन में कुछ बड़ा करने की चाह थी। उन्होंने एक बार अपने प्रोफेसर से कहा था कि वह परिवार को छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे, जब यह उनके करियर की बात आई। यह उनके पारिवारिक जुड़ाव को दर्शाता है। उनके कॉलेज के दोस्त निष्कर्ष गुप्ता ने शुभम के साथ बिताए अंतिम पलों की याद में कहा कि उन्होंने एक दोस्त की शादी में बहुत डांस किया था, और अब इसी तरह उनकी मुलाकात नहीं हो सकेगी।
शुभम का मित्र राहुल, जो जेके ग्रुप में काम करता है, ने कहा कि आज के समय में शुभम जैसे मिलनसार व्यक्तित्व होना असामान्य है। उन्होंने बताया कि शुभम शादी के बाद अपनी पत्नी को पूरा समय देता था और उनके साथ कई यात्रा पर भी गया था। शुभम की यही खासियत थी, जिसने उन्हें अपने दोस्तों और परिवार के करीब रखा। उनका व्यक्तित्व और विचारधारा अविस्मरणीय रहेगी और उनके सभी दोस्त और परिवार उन्हें हमेशा याद रखेंगे।
