शनिवार की सुबह सर्वप्रथम मठ के गर्भगृह में विराजमान श्रीकरुणानिधान सरकार का दिव्य श्रृंगार किया गया। उसके बाद उनका पूजन-अर्चन कर भव्य आरती उतारी। तदुपरांत भगवान काे विभिन्न प्रकार के पकवानाें का भाेग लगाया गया। फिर दाेपहार में संत-महंताें का भंडारा प्रस्तावित रहा, जिसमें काफी संख्या में संताें ने बड़े ही चाव संग प्रसाद ग्रहण किया। अंत में स्व. प्राेफेसर जनार्दन प्रसाद की बेटी गायत्री प्रकाश और गीता सक्सेना दिल्ली ने पधारे हुए संत-महंतों का स्वागत-सत्कार कर भेंट, विदाई दिया। इस माैके पर गायत्री प्रकाश एवं गीता सक्सेना ने बताया कि उन्होंने भगवान श्रीराम की पावन नगरी अयोध्या में अपने पिता स्व. जनार्दन प्रसाद की 99वीं जयंती हर्षोल्लास पूर्वक मनाई है। जाे सेवा दिवस के रूप में मना। जयंती उत्सव पर संत-महंताें के विशाल भंडारा संग कई धार्मिक कार्यक्रम आयाेजित रहा। संताें काे भेंट, विदाई व दक्षिणा दिया गया। उनके पिता अब इस दुनिया में नही हैं। लेकिन उनकी यश एवं कीर्ति सदैव हम सबके साथ रहेगी। वह मगध यूनिवर्सिटी बिहार में प्राेफेसर थे। उनका भगवान श्रीराम और उनकी नगरी अयोध्या से बहुत लगाव था। यही कारण है कि वह समय-समय पर अयाेध्यानगरी आते रहे। साथ ही साथ बजरंगबली, कनक भवन बिहारी-बिहारिणी सरकार, रामलला का दर्शन करते थे। अगले वर्ष उनकी 100वीं जयंती बड़े ही भव्यता के साथ अयोध्याधाम में मनाई जायेगी। जिस पर कथा का कार्यक्रम कराने पर भी विचार किया जा रहा है। इसके अलावा संताें के भंडारे संग अन्य धार्मिक कार्यक्रम-अनुष्ठान भी हाेगा। गीता सक्सेना ने बताया कि दिल्ली यूनिवर्सिटी में बॉटनी के प्राेफेसर हैं। जाे अपना आदर्श अपने पिता को मानती हैं। उन्हीं बतलाए व दिखलाए हुए मार्ग पर चल रही हैं। इस अवसर पर जानकीघाट बड़ास्थान के महंत जन्मेजय शरण, बड़ाभक्तमाल के महंत स्वामी अवधेश कुमार दास, कनक महल के महंत सीताराम दास महात्यागी, डाड़िया मंदिर के महंत गिरीश दास, सीता सदन के महंत किशाेरी शरण, गयामंदिर के महंत केदार दास, महंत रामशरण दास रामायणी, महंत निर्मल शरण, महंत प्रशांत दास शास्त्री, आनंद शास्त्री, व्यास सुधीर शरण, संतदास, सूरज दास, आदि संत-महंत माैजूद रहे।
