त्रेतायुगीन परंपरा का हम लाेग आज भी निर्वाहन कर रहे हैं और अपने-अपने मठ, मंदिरों में युगल सरकार को झूले पर पधराकर झूला झुला रहे हैं। जाे भी मनुष्य युगल सरकार के झूलन झांकी का दर्शन करता है। ताे उसे सांसारिक माताओं की गाेद में कभी नही झूलना पड़ता है। वह सर्वथा के लिए आवागमन से मुक्त हो जाता है। झूलनाेत्सव में कलाकारगण अनेकानेक झूलन के पद “झूलन में आज सज-धज के युगल सरकार बैठे हैं..। झूला झूलें अवधबिहारी संग जनकदुलारी..। प्यारी संग झूलत प्रीतम प्याराे..” आदि गाकर उत्सव में चार-चांद लगा रहे हैं। कलाकारों द्वारा झूलन महोत्सव की महफिल सजाई जा रही है। इससे श्राेतागण मंत्रमुग्ध हाे रहे हैं। श्रीरामहर्षण आदि मैथिल सख्यपीठ के पीठाधिपति श्रीमहंत कमलेश्वर दास महाराज के कुशल संयाेजन में प्रतिदिन युगल सरकार के झूलन महोत्सव की झांकी सज रही है। भगवान के झूलन झांकी का दर्शन कर साधु-संत, भक्तजन पुण्य के भागीदार बन रहे हैं। मठ में नित्य सायंकाल आरती-पूजन पश्चात युगल सरकार के झूलन की दिव्य झांकी सज रही है, जिसका सिलसिला देररात्रि तक चल रहा है। कलाकार विभिन्न झूलन गीताें से झूलनाेत्सव की शाेभा बढ़ा रहे हैं। पूरा मंदिर परिसर झूलनाेत्सव के उल्लास में डूबा हुआ है। जहां आस्था, श्रद्धा की त्रिवेणी बह रही है। चाराें ओर भक्तिमय वातावरण छाया हुआ है। श्रीमहंत कमलेश्वर दास महाराज कलाकारों को नेग-न्याैछावर भी भेंट कर रहे हैं। मंदिर प्रांगण में युगल सरकार के झूलन झांकी का दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। जाे दर्शन कर अपना जीवन सफल बना रहे हैं।
