मनोज पाल

मुज़फ्फरनगर | मुज़फ्फरनगर की उपजाऊ धरती सदियों से संघर्ष और किसानों की चेतना की जननी रही है। इसी मिट्टी से जन्मा है खतौली तहसील का युवा नेतृत्वकर्ता अंकित चंदेल, जिनका जीवन आज समाजसेवा, संघर्ष और समर्पण का जीवंत प्रतीक बन चुका है। उनकी कहानी केवल अपने लिए जीने की नहीं, बल्कि दूसरों के दुख और कठिनाइयों में भागीदार बनने की कहानी है।

वर्ष 2019–20 उनके जीवन का वह निर्णायक पल था जब दिल्ली के गाज़ीपुर बॉर्डर पर किसान आंदोलन चरम पर था। किसानों की पीड़ा और उनकी लड़ाई ने अंकित के हृदय को झकझोर दिया। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत धरने पर अडिग खड़े थे, और वहां मौजूद हर व्यक्ति की आँखों में उम्मीद की झिलमिलाहट थी। अंकित ने महसूस किया कि मौन रहना अब किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है। उसी दिन उन्होंने यह संकल्प लिया कि उनका जीवन केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि समाज और किसानों की आवाज़ उठाने में समर्पित होगा। यही पल उनके लिए जीवन का आदर्श और प्रेरणा का स्रोत बन गया।

उनकी निष्ठा, साहस और सक्रियता को देखकर यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत ने उन्हें खतौली तहसील का युवा अध्यक्ष नियुक्त किया। यह पद केवल औपचारिक नहीं था; यह किसानों की आशा, संघर्ष और विश्वास का प्रतीक था। तब से आज तक अंकित हर आंदोलन की अग्रिम पंक्ति में खड़े रहे। चाहे मुज़फ्फरनगर एसएसपी कार्यालय का धरना हो, जागहेड़ी टोल प्लाज़ा का आंदोलन, भोपा थाना, रतनपुर थाना या खतौली थाना परिसर—हर आंदोलन में उनकी उपस्थिति ने किसानों और युवाओं को साहस और ऊर्जा दी। उनके नारों और नेतृत्व ने यह संदेश दिया कि संघर्ष की राह में अकेला होना कोई कमजोरी नहीं, बल्कि स्थायित्व और दृढ़ता की पहचान है।

व्यवसायिक जीवन में भी अंकित ने अपनी मेहनत, ईमानदारी और दूरदर्शिता से उल्लेखनीय सफलता पाई। जूतों के व्यापार में उन्होंने संघर्ष और मेहनत के बल पर सफलता अर्जित की और अब अपने पिता देवेंद्र सिंह ठेकेदार की ठेकेदारी को भी पूरी निष्ठा और कर्मठता से आगे बढ़ा रहे हैं। परंतु उनका मानना है “रोज़ी-रोटी हर कोई कमाता है, किंतु वास्तविक गौरव वही है जो अपने श्रम और क्षमताओं का अंश समाज और मानवता को अर्पित करे।” यही सोच उन्हें भीड़ से अलग और विशिष्ट बनाती है। अंकित केवल अपने लिए नहीं जीते, बल्कि समाज और समुदाय के लिए। उनके व्यक्तित्व में साहस, समर्पण और दृढ़ता का अद्भुत संगम है, जो युवाओं के लिए प्रेरणा बनता है।

समाजसेवा और संगठन में उनकी निरंतर सक्रियता को देखते हुए हाल ही में उन्हें अखिल भारतीय पाल महासभा का युवा जिला अध्यक्ष भी नियुक्त किया गया। अब उनके कंधों पर दोहरी जिम्मेदारी है—एक ओर किसान यूनियन (टिकैत) के युवा तहसील अध्यक्ष का दायित्व और दूसरी ओर पाल समाज के युवाओं का नेतृत्व। यह उनकी बढ़ती सामाजिक प्रतिष्ठा और लोगों के बीच स्थापित विश्वास का प्रमाण है।

मूलतः गांव मोरकुक्का (थाना मंसूरपुर) से संबंध रखने वाले और वर्तमान में जमुना विहार, खतौली में निवासरत अंकित बचपन से ही समाजोपयोगी कार्यों में सक्रिय रहे हैं। उनके परिवार से मिले संस्कारों ने उन्हें यह शिक्षा दी कि मानवता केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं है, बल्कि दूसरों की पीड़ा में सहभागी बनकर समाज के लिए कार्य करना ही असली धर्म है।अंकित चंदेल की कहानी इस बात का प्रमाण है कि संघर्ष, निष्ठा और समर्पण के बल पर कोई भी युवा केवल अपनी ही नहीं, बल्कि पूरे समाज की तक़दीर बदल सकता है। उनके प्रयास युवाओं को यह संदेश देते हैं कि अगर मन में समर्पण और मानवता का अलख जगे, तो कठिनाइयाँ मार्ग की दीवारें बनकर नहीं, बल्कि अवसर की सीढ़ियाँ बनकर सामने आती हैं।

आज अंकित चंदेल केवल एक युवा नेता नहीं, बल्कि संस्कारों और समाजसेवा का जीवंत प्रतीक बन चुके हैं। उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि वास्तविक महानता भौतिक सुख-सुविधाओं में नहीं, बल्कि त्याग, सेवा और दूसरों की भलाई में निहित है।

लेखक :- मनोज पाल, 9911711593

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