कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद जयराम रमेश ने केंद्र सरकार की विदेश नीति पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने अमेरिका और ईरान के बीच ही सीजफायर पर पाकिस्तान द्वारा निभाई गई मध्यस्थ की भूमिका को पीएम मोदी की कूटनीतिक विफलता करार दिया है। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला

क्या है पूरा मामला

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान पर जारी सैन्य हमलों को रोकने के लिए 14 दिनों के युद्धविराम की घोषणा की है। इस समझौते के तहत अमेरिका ने ईरान के 10-सूत्रीय शांति प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। ईरान ने भी जवाब में शांति पहल का स्वागत करते हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के माध्यम से सुरक्षित समुद्री मार्ग प्रदान करने का आश्वासन दिया है। विशेष बात यह है कि इस पूरी बातचीत की मेजबानी और मध्यस्थता पाकिस्तान ने की है।

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जयराम रमेश ने पूछे तीखे सवाल

कांग्रेस नेता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक लंबा बयान साझा करते हुए कहा कि पाकिस्तान की इस भूमिका ने प्रधानमंत्री की ‘व्यक्तिगत कूटनीति’ की पोल खोल दी है। रमेश के बयान के प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • कूटनीतिक हार: उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने और उसे एक ‘विफल राष्ट्र’ साबित करने की मोदी सरकार की नीति पूरी तरह नाकाम रही है।
  • पश्चिम एशिया संकट पर चुप्पी: रमेश ने सवाल उठाया कि जब 28 फरवरी को ईरान के शीर्ष नेतृत्व की हत्या के साथ यह संकट शुरू हुआ, तब भारत चुप क्यों था? उन्होंने कहा कि पीएम मोदी की हालिया इजरायल यात्रा ने भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाया है क्योंकि उन्होंने गाजा और वेस्ट बैंक के मुद्दों पर कोई ठोस बात नहीं की।
  • ऑपरेशन सिंदूर’ का रहस्य: कांग्रेस सांसद ने सरकार से स्पष्टीकरण मांगा कि 10 मई 2025 को अचानक ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को क्यों रोक दिया गया था? उन्होंने आरोप लगाया कि इसकी जानकारी भी सबसे पहले अमेरिकी प्रशासन द्वारा दी गई थी।
  • विदेश मंत्री पर निशाना: रमेश ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर को भी आड़े हाथों लिया, जिन्होंने पूर्व में पाकिस्तान को केवल एक ‘दलाल’ बताकर खारिज कर दिया था।

पाकिस्तान का रुख और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस युद्धविराम को एक बड़ी उपलब्धि बताते हुए दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों को 10 अप्रैल 2026 को इस्लामाबाद में स्थायी शांति वार्ता के लिए आमंत्रित किया है।

दूसरी ओर, अमेरिकी विशेषज्ञों ने इस घटनाक्रम पर हैरानी जताई है। फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज (FDD) के जोनाथन शेंजर ने कहा कि पाकिस्तान का अचानक मध्यस्थ के रूप में सामने आना ‘अजीब’ है। उन्होंने संदेह जताया कि क्या पाकिस्तान यह सब चीन के दबाव या इशारे पर कर रहा है, क्योंकि वह चीन के भारी कर्ज तले दबा हुआ है।

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