कर्नाटक हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के अक्टूबर 2024 के उस फैसले को खारिज कर दिया जिसमें 2022 के पुराने हुबली दंगों से जुड़े 43 आपराधिक मामले वापस लेने का आदेश दिया गया था। इन मामलों में विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ता, राजनेता और अन्य प्रभावशाली व्यक्ति शामिल थे। हाई कोर्ट ने फैसले को सरकार के लिए कानूनी झटका माना जा रहा है, जिसने 10 अक्टूबर को मामले वापस लेने का आदेश दिया था। इस फैसले को अधिवक्ता गिरीश भारद्वाज द्वारा दायर एक जनहित याचिका (पीआईएल) के माध्यम से चुनौती दी गई थी, जिन्होंने इस कदम की वैधता पर सवाल उठाया था। मुख्य न्यायाधीश एनवी अंजारिया और न्यायमूर्ति केवी अरविंद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने जनहित याचिका स्वीकार कर ली और सरकार की कार्रवाई पर गंभीर चिंता व्यक्त की।

अपने फैसले में अदालत ने वापसी के आदेश को गैरकानूनी घोषित किया और 15 अक्टूबर, 2024 की अनुवर्ती सरकारी अधिसूचना को भी रद्द कर दिया। यह फैसला कर्नाटक सरकार को इन हाई-प्रोफाइल आपराधिक मामलों को वापस लेने से रोकता है। विपक्षी भाजपा ने पहले हुबली दंगों के मामले को वापस लेने के कर्नाटक के कदम की आलोचना की थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि कांग्रेस सरकार मुस्लिम समुदाय को खुश कर रही है।

विपक्ष के उपनेता अरविंद बेलाड ने फैसले की आलोचना करते हुए कहा, “ये वे लोग हैं जिन्होंने पुलिस स्टेशन और पुलिस पर हमला किया। उन्होंने पुलिस को जिंदा जलाने की कोशिश की। लेकिन कांग्रेस सरकार मुस्लिम समुदाय और अल्पसंख्यक वोटों को खुश करने के लिए ऐसा कर रही है। यह कांग्रेस के डीएनए में है।

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