38वें राष्ट्रीय खेलों के फुटबॉल के फाइनल में केरल और उत्तराखंड के बीच शुक्रवार शाम शानदार मुकाबला देखने को मिला। हल्द्वानी के गौलापार स्थित इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय खेल परिसर में शाम 6 बजे से केरल और उत्तराखंड के बीच फाइनल मुकाबला खेला गया। सीटी बजते ही उत्तराखंड ने पहला अटैक किया, मगर केरल की रक्षापंक्ति ने शानदार खेल दिखाकर उस कोशिश को नाकाम कर दिया। इसके बाद दोनों टीमों ने कई मूव बनाए, लेकिन किसी को भी सफलता नहीं मिल सकी। मैच के 47वें मिनट में उत्तराखंड के खिलाड़ी को गोल करने के मौका मिला था, लेकिन यह मौका टीम ने गंवा दिया। इस कारण पहला हाफ गोलरहित समाप्त हो गया था। दूसरे हाफ में भी दोनों टीमों ने शुरू से ही आक्रामक खेल दिखाया। मैच के 53वें मिनट में केरल के गोकुल ने गोल कर टीम को मैच में 1-0 से बढ़त दिला दी। उत्तराखंड ने काफी कोशिश की, लेकिन टीम को सफलता नहीं मिल सकी। मैच के 75वें मिनट में उत्तराखंड के शैलेंद्र नेगी को गलत तरीके से रोकने पर केरल के 18 नंबर जर्सी के खिलाड़ी को रेफरी ने रेड कार्ड दिया। इस दौरान मिली फ्री किक पर उत्तराखंड के खिलाड़ी फायदा नहीं उठा सके।

केरल के खिलाड़ी को गलत तरीके से रोकने पर दूसरा पीला कार्ड शैलेंद्र को मिला और रेड कार्ड के साथ शैलेंद्र नेगी एक्सट्रा टाइम में मैदान से बाहर हो गए। इससे उत्तराखंड को बड़ा झटका लगा। इसके बाद उत्तराखंड ने लगातार कई मूव बनाए, लेकिन खिलाड़ी उन्हें गोल में नहीं बदल सके। आखिरकार उत्तराखंड को 1-0 से हार का सामना करना पड़ा। इससे पहले खेले गए कांस्य पदक के मुकाबले में दिल्ली ने असम को 2-1 के अंतर हराकर कांस्य पदक अपने नाम किया।
38वें राष्ट्रीय खेलों में कोटद्वार से आए फुटबॉल कोच अरुण नेगी ने कहा कि प्रदेश में फुटबॉल तो कई जगह होता है। मगर हल्द्वानी जैसी भीड़ फुटबॉल के लिए पहली बार देखी है। यह उत्तराखंड में फुटबॉल के प्रति लोगों के प्यार को दर्शाता है। उत्तराखंड की टीम फाइनल में अच्छा खेली है। कुछ मौके चूके जरुर, लेकिन केरल की टीम भी शानदार रही है। उत्तराखंड में युवाओं में अधिक रुचि बढ़ेगी

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