हरदोई में 11वीं क्लास के एक छात्र के साथ कथित रूप से शिक्षक और कॉलेज प्रशासन द्वारा बेरहमी का मामला सामने आया है. जानकारी के अनुसार, छात्र लंच के समय दूसरी क्लास में बैठा था, जिस पर नाराज शिक्षक ने उसे क्लासरूम के बाहर पकड़कर लात-घूंसे से पीटा.

इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है. छात्रों का आरोप है कि इसके बाद कॉलेज के अन्य शिक्षक भी एकत्रित हुए और छात्र को प्रिंसिपल ऑफिस ले जाकर वहां भी जमकर पीटा गया. बताया जा रहा है कि प्रिंसिपल ऑफिस में छात्र को मुर्गा बनाकर पीटा गया.

छात्र के परिवार ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. शिकायत के आधार पर पुलिस ने तीन नामजद और दो अज्ञात शिक्षकों के खिलाफ मामला दर्ज किया है. पुलिस ने बताया कि आरोपी छात्रों को धमकी दे रहे थे कि शिकायत करने पर उनका भविष्य खराब कर देंगे. अभी मामले की जांच जारी है और पुलिस द्वारा आरोपी शिक्षकों की जल्द पहचान कर कार्रवाई की कोशिश की जा रही है.

क्या है नियम?
भारत में स्कूल या कॉलेज में छात्रों के साथ शारीरिक दंड देना पूरी तरह से गैरकानूनी है. शिक्षा का अधिकार कानून (RTE Act, 2009) और भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 323, 324, 325 के तहत किसी भी छात्र को मारना या चोट पहुंचाना अपराध है. स्कूलों में आमतौर पर केवल चेतावनी या अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुमति होती है, शारीरिक दंड की नहीं. ऐसे मामलों में छात्र या अभिभावक पुलिस में शिकायत दर्ज करा सकते हैं, और स्कूल प्रशासन को दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाना पड़ता है.

क्या है RTE Act?
शिक्षा का अधिकार कानून (RTE Act, 2009)
यह कानून प्राइमरी स्कूलों में बच्चों के लिए शिक्षा सुनिश्चित करता है.
इसके तहत किसी भी छात्र को शारीरिक या मानसिक यातना देना, अपमानित करना या दंडित करना कठोर रूप से मना है.

बाल संरक्षण कानून
भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 323, 324, 325 छात्रों के साथ शारीरिक हिंसा को अपराध मानती हैं.
अगर शिक्षक ने बच्चे को पीटा है, तो यह संज्ञेय अपराध है.

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