फार्स समाचार एजेंसी ने रविवार को बताया कि ईरान ने एक नया कानून तैयार किया है, जिससे होर्मुज पर उसका कंट्रोल और मजबूत हो जाएगा. इस कानून में इजरायल से जुड़े जहाजों पर पाबंदी भी शामिल है. ईरानी संसद की सिविल इंजीनियरिंग समिति के अध्यक्ष मोहम्मद रजाई-कूची ने रविवार को घोषणा की कि इस मसौदा कानून को अंतिम रूप देने का काम लगभग पूरा होने वाला है.

मसौदा कानून के मुताबिक, इजरायल से जुड़े जहाजों और मालवाहक जहाजों का इस होर्मुज से गुजरना पूरी तरह से प्रतिबंधित होगा. जिन देशों को ईरान अपना विरोधी मानता है, उनके जहाजों को यहां से गुज़रने के लिए देश की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद से मंजूरी लेनी होगी. जिन देशों ने पहले ईरान को नुकसान पहुंचाया है, उन्हें तब तक यहां से गुजरने की इजाजत नहीं होगी, जब तक वे हर्जाना नहीं चुका देते.

ईरानी रियाल में अदा करनी होगी फीस

प्रस्तावित नियमों के तहत सभी जहाजों को ट्रांजिट फीस, सिर्फ ईरानी रियाल में ही अदा करनी होगी. इस शुल्क से होने वाली कुल आय का 30 प्रतिशत हिस्सा ईरान के फोर्सेज को मजबूत करने के लिए खर्च किया जाएगा, जबकि 70 प्रतिशत हिस्सा लोगों की आजीविका में सुधार के लिए उपयोग किया जाएगा.

होर्मुज पर ईरान बनाम अमेरिका

ये कदम ऐसे समय में उठाए गए हैं, जब होर्मुज को लेकर संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच तनाव काफी बढ़ गया है. ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की नौसेना ने शनिवार को इस होर्मुज पर फिर से नाकाबंदी लागू कर दी. उसने इसकी वजह यह बताई है कि अमेरिका ने संघर्ष-विराम की प्रतिबद्धता का उल्लंघन करते हुए ईरानी बंदरगाहों पर अपनी नौसैनिक नाकाबंदी नहीं हटाई है.

क्या है होर्मुज की ताजा स्थिति?

वहीं ब्लूमबर्ग ने जहाजों की आवाजाही पर नजर रखने वाले डेटा के आधार पर बताया कि उस दिन कम से कम 13 तेल टैंकरों को वापस लौटना पड़ा और रविवार को इस होर्मुज से गुजरता हुआ कोई भी जहाज नहीं देखा गया. ईरान ने 28 फरवरी से होर्मुज पर अपना कंट्रोल और सख्त कर दिया है. यह कदम उसने तब उठाया था, जब इजरायल और संयुक्त राज्य अमेरिका ने मिलकर ईरानी क्षेत्र पर हवाई हमले किए थे; इसके बाद ईरान ने इन दोनों देशों से जुड़े या उनके स्वामित्व वाले जहाजों के यहां से गुजरने पर रोक लगा दी थी. बाद में, जब पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में ईरान के साथ चल रही शांति वार्ता विफल हो गई, तो अमेरिका ने भी इस जलमार्ग पर अपनी ओर से नाकाबंदी लागू कर दी.

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