अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि महाकुंभ के सफल आयोजन के लिए प्रधानमंत्री मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रशंसा और बधाई के पात्र हैं. इतने बड़े विराट आयोजन को प्रदेश और केंद्र सरकार के अच्छे तालमेल से संपन्न कराया गया. इसके अलावा इस मामले पर विपक्ष आरोंप पर पलटवार करते हुए कहा कि – AI और मोबाइल के युग में अगर विपक्ष को लगता है कि कुछ छुपाया गया है तो यह हास्यास्पद है. आज के जमाने में सभी के हाथ में मोबाइल है और सब कुछ स्थितियां सबके सामने स्पष्ट रही.

अखिल भारतीय संत समिति की तरफ से स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि अखिलेश यादव को एक बात पर टिकना चाहिए पहले कहे – कोई आ नहीं रहा है, फिर आंकड़ों पर सवाल उठाया और अब व्यवस्था को लेकर सवाल उठा रहे हैं. उन्होंने शुरू से ही इस आयोजन को लेकर सियासत की है. 60 करोड लोग आए और 60 करोड लोग घर पर थे, यानी 120 करोड लोग महाकुम्भ से जुड़े. 50 करोड़ युवा सीधे तौर पर सनातन परंपरा से जुड़े यह सुखद है.  

“वेटिकन सिटी वालों से अपेक्षा करना भी मूर्खता है”
राहुल गांधी के न जाने पर स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि बचे कांग्रेस के अवशेष में कुछ लोगों का जमीर जिंदा है जो सनातन से जुड़े हैं. जो कांग्रेस नेता आए, उनका स्वागत किया जाना चाहिए. लेकिन जिनके निर्णय वेटिकन सिटी के आधार पर होते हैं उनसे अपेक्षा करना भी मूर्खता है. राहुल गांधी ने सोमनाथ मंदिर में गैर हिंदू होने के अपने मनसा को पहले ही स्पष्ट कर दी हैं.

महाशिवरात्रि की तिथि को सरकारी तिथि से जोड़ने पर बड़ा बयान देते हुए कहा कि वेटीकन सिटी व कांग्रेस से आए मुख्यालय का नोट पढ़कर कुछ लोग ऐसी बातें करते हैं. ऐसे मूर्खो के लिए हमारे पास कोई शब्द नहीं है. उन्हें हम धर्माचार्य नहीं मानते. हमारे महाकुंभ की परंपरा में प्रमुख तिथियों का स्पष्ट तौर पर उल्लेख है.

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