रुद्रप्रयाग में रविवार सुबह भूस्खलन के कारण सोनप्रयाग-गौरीकुंड मार्ग पर वाहनों की आवाजाही बंद हो गई, जबकि बदरीनाथ मंदिर की तलहटी में अलकनंदा नदी में जलप्रवाह अचानक बढ़ने के बाद प्रशासन ने श्रद्धालुओं को तट से दूर रहने को कहा है। 

अधिकारियों ने बताया कि शनिवार देर रात हुई बारिश के बाद रविवार सुबह मुनकटिया के पास भूस्खलन होने से मलबा से सोनप्रयाग-गौरीकुंड मार्ग पर आ गया जिससे मोटर मार्ग वाहनों की आवाजाही के लिए बंद हो गया। उन्होंने बताया कि सुरक्षा के मद्देनजर श्रद्धालुओं को सोनप्रयाग तथा गौरीकुंड में ही रोकने तथा संबंधित एजेंसियों के स्तर पर मार्ग खोले जाने की कार्रवाई शुरू की गई। अधिकारियों ने बताया कि भूस्खलन वाली जगह पर जेसीबी मलबे को साफ करने में जुटी है। पुलिस ने बताया कि अभी मार्ग को पैदल चलने लायक बनाया गया है जिससे यात्रियों का पैदल आवागमन शुरू हो गया है। 

हालांकि, केदारनाथ धाम पहुंचने के लिए पैदल श्रद्धालुओं को छह किलोमीटर अतिरिक्त चलना पड़ रहा है। लगातार बारिश के कारण गौरीकुंड से केदारनाथ धाम तक का पैदल मार्ग भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है ऐसे में प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि मौसम के पूर्वानुमान के हिसाब से अपनी यात्रा करें तथा इस संबंध में पुलिस प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करें। चमोली जिले में बदरीनाथ मंदिर की तलहटी पर अलकनंदा का जलप्रवाह अचानक बढ़ जाने से पुलिस और प्रशासन की ओर से तीर्थयात्रियों को ब्रह्म कपाल और नारद कुंड इलाके में सतर्क रहने और नदी के तट से दूर रहने के निर्देश दिए जा रहे हैं। 

पिछले तीन सालों से महायोजना के तहत ‘रिवरफ्रंट’ का निर्माण किया जा रहा है और इसका मलबा नदी के पास डाले जाने के कारण बदरीनाथ के समीप अलकनंदा में पानी उपर तक आ जाता है। पिछले साल भी तप्त कुंड और ब्रह्म कपाल इलाके में अलकनंदा का प्रवाह बाढ़ की स्थिति में आ गया था। पुलिस ने बताया कि इस क्षेत्र में अचानक बारिश के कारण बदरीनाथ धाम में अलकनंदा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। उसने बताया कि सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस द्वारा घोषणा कर श्रद्धालुओं को नदी के किनारे न जाने की हिदायत दी जा रही है। 

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