घरेलू विवादों में घटनाओं का प्रारूप कैसे बदल जाता है इसका उदाहरण रुड़की में मिला है। यहां सब्जी में कम नमक को लेकर पति-पत्नी के बीच हुए विवाद ने मारपीट के बाद दहेज उत्पीड़न का रूप ले लिया। हो सकता है कि इस विवाद का मूल दहेज रहा हो लेकिन विवाद सब्जी में नमक को लेकर हुआ था। पुलिस के सामने महिला ने साफ कह दिया कि ससुराल में दहेज के लिए उसके साथ मारपीट की जा रही है। बाद में जब पुलिस ने दोनों की काउंसलिंग कराई तो पता चला कि विवाद सब्जी में कम नमक को लेकर को है।
दरअसल पति को कढ़ी में नमक तेज चाहिए और पत्नी ने पूरे परिवार के टेस्ट के अनुसार नमक डाला। पत्नी का कहना है कि पति तेज नमक खाते हैं बाकी सभी सदस्य सामान्य। ऐसे में पति तो अपने अनुसार नमक खाने में बढ़ा सकते हैं लेकिन अगर तेज कर दिया तो कम कैसे होगा। इसी सोच के साथ पत्नी ने कढ़ी बनाई और नमक कम रह गया।
इस पूरे मामले में पति की बड़ी गलती है ये कि उसने पत्नी पर हाथ छोड़ दिया मारपीट कर दी। ससुराल में अपने साथ हुए इस व्यवहार के खिलाफ पत्नी थाने पहुंच गई और दहेज उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए तहरीर दे दी। इस पर ससुराल पक्ष के लोग डर गए लेकिन थाने में विवाहिता की गलती ही निकालते रहे। इसके बाद पुलिस ने दंपति को काउंसलिंग के लिए बुलाया और दोनों के परिजनों को बाहर कर दिया।
जब पुलिस ने दोनों से पूछा कि सच बताओ मामला क्या है तो दोनों रोने लगे और बोले कि मामला कुछ नहीं है विवाद कढ़ी में नमक को लेकर हुआ था। बाद में परिवार वालो ने विवाद में और नमक-मिर्च लगा दी जिसके बाद पति ने हाथ छोड दिया। काउंसलिंग के बाद दोनों ने अपनी-अपनी गलती मान ली और मामला निपट गया।
रुड़की महिला हेल्पलाइन की प्रभारी के अनुसार हर रोज इस तरह के मामले आते हैं। अधिकांश मामलों में विवाद छोटी-छोटी बातों के लेकर शुरू होता है। बाद में यही विवाद दहेज उत्पीड़न और अन्य तरह के गंभीर आरोपों में बदल जाता है। काउंसलिंग के बाद अधिकांश मामलों में दंपति को अपनी गलतियों का अहसास हो जाता है। देखने में आया है कि अगर दोनों पक्षों के परिजनों के अलग हटाकर बात की जाती है तो मामले जल्द सुलझ जाते हैं। इससे पता चलता है कि दंपति के बीच विवाद की वजह कई बार परिजनों का अहम भी बनता है।
